मधुबनी. मिथिला में लगन शुरू है. विवाह जैसे शुभ कार्य करने के लिए परदेस से लोग अपने घर आ रहे हैं. शुभ कार्य में उपयोग आने वाले सामान की खरीद के लिए लोग स्थानीय बाजार में आ रहे हैं. इस कारण बाजार में रौनक छाई हुई है. कपड़े, ज्वेलरी, फल, फूल, खाना खाने वाले पत्ते, किराना सामान आदि की दुकानों में खरीदारों की भीड़ देर रात तक लगी रहती है. गुजरात से बन कर गन्ने के छिलके से बने थाली व कटोरा, झारखंड व बंगाल के पत्ते, कोलकाता की फूल की खूब मांग है. विवाह में जाने वाली गाड़ी की सजावट के बुकिंग पहले से जारी है. 2500 से लेकर 5100 सौ तक में एक गाड़ी के सजावट पर खर्च आता है. आर्टिफिशियल फूल के बजाय लोग गुलाब, गेंदा व रजनीगंधा फूल से गाड़ी सजाने की डिमांड कर रहे हैं. वहीं इस लगन में मद्रासी आम भी खूब बिक रहे हैं. शादी जैसे शुभ मुहूर्त के मौके पर फूलों की डमांड काफी बढ़ गयी है. महंगाई का सबसे अधिक असर इसी पर देखा जा रहा है. इस लगन में फूलों की कीमत में 40 से 50 फीसदी की वृद्धि देखी जा रही है. गुलाब, गेंदा व रजनीगंधा के दाम आसमान छू रहे हैं. नवंबर माह में लगन के मौके पर अभी की तुलना में फूलों के दाम में आधे का अंतर बताया जा रहा है. जिसके कारण गाड़ी की सजावट में 2 गुणे से अधिक की कीमत में वृद्धि हुई है. सबसे अधिक भीड़ फूलों की दुकानों पर ही देखी जा रही है. प्लास्टिक और थर्माकोल के विकल्प में गुजरात से बनकर गन्ने की छिलका से बने सामान बाजार में आ रहा है. सामान प्लास्टिक व थर्मोकोल की अपेक्षा महंगी है. लेकिन पर्यावरण के दृष्टिकोण से काफी अच्छा है. लोग सामान की जमकर खरीदारी कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि यह सामान गुजरात के मोरबी व वांकनेर व उत्तर प्रदेश के वाराणसी से बाजार में मंगाया जा रहा है. जिसके कारण इसके दाम अधिक लग रहे हैं. पॉलिथीन थर्माकोल पर प्रतिबंध लगने के बाद उड़ीसा और झारखंड से पत्तल बाजार में आ रहा है. झारखंड की अपेक्षा उड़ीसा का पत्तल काफी अच्छा है. जो थर्माकोल की प्लेट से काफी बेहतर है. पत्तल का दाम कम होने के कारण बाजार में खूब बिक रही है. लोग थर्माकोल से बने प्लेट के बजाय उड़ीसा के पत्तल की खरीदारी कर रहे हैं. हालांकि गन्ने के छिलके से बनी थाली 8 से 9 रुपये प्रति पीस बिक रहा है. वहीं पत्ते से बना थाली 2 से 3 प्रति पीस बाजार में उपलब्ध है.
लगन को ले फल-फूल व पत्ते के बाजार में आयी रौनक
मिथिला में लगन शुरू है. विवाह जैसे शुभ कार्य करने के लिए परदेस से लोग अपने घर आ रहे हैं.
