Madhubani News: बिहार सरकार के 'सात निश्चय-3 (2025-2030)' कार्यक्रम के तहत अब मधुबनी समेत राज्य के जिला अस्पतालों की तस्वीर बदलने की तैयारी शुरू हो गई है. सरकार जिला अस्पतालों को चरणबद्ध तरीके से सुपर स्पेशलिटी सेंटर के रूप में विकसित करेगी. इसके लिए राज्य स्वास्थ्य समिति ने सभी जिला और अनुमंडलीय अस्पतालों का गैप एनालिसिस (अंतर-विश्लेषण) कराने का निर्देश जारी किया है. मधुबनी सिविल सर्जन को भी दो दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट भेजने को कहा गया है.
दो दिनों में देनी होगी गैप एनालिसिस रिपोर्ट
राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पाण्डेय ने सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों और आवश्यक सुविधाओं का आकलन कर दो दिनों के भीतर सत्यापित रिपोर्ट भेजी जाए. इस रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि किन अस्पतालों में कौन-कौन से उपकरण और सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत है.
लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर होंगे आधुनिक
योजना के तहत जिला और अनुमंडलीय अस्पतालों के लेबर रूम और ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी ऑपरेशन थिएटर को आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा. सरकार का उद्देश्य है कि गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए बड़े शहरों या निजी अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े और जिला अस्पतालों में ही बेहतर इलाज मिल सके.
आईपीएचएस मानकों के अनुसार मिलेंगी सुविधाएं
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों में भारतीय जन स्वास्थ्य मानक (IPHS) के अनुसार सभी आवश्यक जीवनरक्षक और आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे. इससे प्रसूति सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी.
बारकोड और पोर्टल से होगी उपकरणों की निगरानी
अस्पतालों में करोड़ों रुपये के चिकित्सा उपकरणों के बेकार पड़े रहने की शिकायतों को देखते हुए सरकार ने डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने का फैसला किया है. सभी उपकरणों की बीईएमएमपी (BEMMP) पोर्टल पर बारकोड के जरिए टैगिंग और मैपिंग की जाएगी. इससे राज्य मुख्यालय से ही यह पता चल सकेगा कि कौन-सा उपकरण किस अस्पताल में चालू है और कौन-सा खराब या अनुपयोगी पड़ा है.
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए अस्पताल अधीक्षक, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, अस्पताल प्रबंधक, जिला कार्यक्रम प्रबंधक और सिविल सर्जन के संयुक्त सत्यापन को अनिवार्य किया गया है. स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिया है कि रिपोर्ट में लापरवाही या गलत जानकारी मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है.
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