Madhubani News: शिल्पग्राम जितवारपुर में चल रहे भवन निर्माण एवं विकास कार्यों के प्राक्कलन (एस्टीमेट) में आवश्यक सुधार की मांग को लेकर कलाकारों ने सरकार को पत्र भेजा है. सरकार की ओर से गठित निगरानी समिति ने निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने के बाद कई तकनीकी कमियों की ओर ध्यान आकर्षित किया है. इस संबंध में बिहार म्यूजियम, पटना के निदेशक को भी आवेदन देकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया गया है.
निगरानी समिति ने सुझाए कई सुधार
निगरानी समिति में पद्मश्री बौआ देवी, निगम पार्षद सुधीरा देवी, उर्मिला देवी और कमल नारायण शामिल हैं. समिति ने निर्णय लिया कि शिल्पग्राम परिसर में भूमि दाताओं के नाम अंकित किए जाएं तथा उनकी स्मृति में प्रतिमा भी स्थापित की जाए. समिति ने सीमेंट की ईंटों के उपयोग पर भी चिंता जताई और कहा कि चौखट एवं दरवाजे लगाने के लिए यह उपयुक्त नहीं होगा.
संवेदक की ओर से बताया गया कि निर्माण कार्य स्वीकृत प्राक्कलन के अनुसार ही कराया जा रहा है. यदि किसी प्रकार का बदलाव करना है तो पहले प्राक्कलन में संशोधन आवश्यक होगा.
प्रवेश द्वार का निर्माण तेजी से जारी
शिल्पग्राम जितवारपुर में मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण तेजी से चल रहा है. मधुबनी-कलुआही मुख्य मार्ग पर बनाए जा रहे इस गेट पर करीब 12 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे लगभग 15 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार और बिहार म्यूजियम, पटना के सहयोग से विकसित हो रहे इस शिल्पग्राम पर कुल 9 करोड़ 2 हजार 470 रुपये खर्च किए जाएंगे.
गुणवत्ता सुधार पर कलाकारों का जोर
स्टेट अवार्ड से सम्मानित कलाकार अमित कुमार झा ने बताया कि निगरानी समिति के निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्यों में कई सुधार की आवश्यकता महसूस की गई. उन्होंने कहा कि बाउंड्री वॉल 5 इंच के बजाय कॉलम-टाई बीम के साथ 10 इंच मोटी लाल ईंट से बनाई जानी चाहिए. साथ ही दीवार के ऊपर दो फीट ऊंची ग्रिलिंग लगाने की भी जरूरत है.
कलाकारों ने परिसर में भूमि दाताओं के नाम अंकित करने, शिल्पग्राम के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले भास्कर कुलकर्णी की प्रतिमा गेस्ट हाउस परिसर में स्थापित करने तथा तालाब के सौंदर्यीकरण एवं घाट निर्माण के लिए भी प्राक्कलन में संशोधन करने की मांग की.
