श्रीमद्भागवत कथा से भक्तिमय हुआ गांव का संपूर्ण वातावरण
खजौली. प्रखंड क्षेत्र के गौड़ीमेरन गांव में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया गया है. भागवत कथा के सुमधुर गीत संगीत एवं भावपूर्ण कथा श्रवण से गांव के संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया है. कथा श्रवण को लेकर आसपास गांव सहित दूर-दराज के भक्त पहुंच रहे हैं.
श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन प्रसिद्ध कथावाचक पंडित श्री हृदयनाथ शास्त्री जी महाराज ने भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव, बाल लीला, माखनलीला, चीरहरण लीला, रासलीला सहित अन्य लीलाओं पर विस्तार से चर्चा की. कथा के क्रम में उन्होंने कहा कि बच्चों को अभिभावक की डांट जरूरी है. अगर यह जरूरी नहीं होता तो मां यशोदा भगवान श्रीकृष्ण को ओखली में नहीं बांधती, उन्हें नहीं डांटती और न ही समय समय पर पिटाई करती. कहा अगर बच्चों को डांट फटकार नहीं लगे तो वह सफल इनसान नहीं बन सकते हैं. जिस प्रकार पौधा व पेड़ बनने से पूर्व बीज को मिट्टी में सरना पड़ता है. इसी क्रम में उन्होंने पूतना उद्धार, तृरणा उद्धार एवं नामकरण की कथा को विस्तार से बतायी. कहा कि बच्चों पर उसके नाम का बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है. अगर ऐसा नहीं होता तो लोग अपने बच्चों का नाम राम, कृष्ण, नारायण के बजाय रावण एवं कंस रखता, लेकिन लोग ऐसा नहीं करते है. कहा कि भक्तिभाव से कथा श्रवण करने से जन्म-जन्मांतर के सभी पाप धुल जाते है. सभी मनोकानाएं पूरी होती है.
मौके पर गणेश सिंह, बमबम झा, सतीश सिंह, बिकू कुमार, परषुराम सिंह, भरत कुमार, बेचनी देवी, संगुला देवी, विमला देवी, गौड़ीशंकर सिंह, दिगंबर सिंह, शिवराम, गोपाल, कोमल, श्रुति, धीरज, गोविन्द जी एवं कन्हैया जी सहित अन्य भक्त सैकड़ों की संख्या में भक्त मौजूद थे.
