मधुबनी : दहेज हत्या के मामले में सुनवाई करते हुए त्वरित न्यायालय द्वितीय के न्यायाधीश यमुना प्रसाद सिंह ने खिरहर थाना क्षेत्र के सोनइ निवासी आरोपी राम प्रवेश साह (पति) लक्ष्मण साह (ससुर) एवं शैलीया देवी (सास) को दफा 304(बी) भादवि में दोषी पाते हुए सात साल सश्रम कारावास की सजा बुधवार को सुनायी है. साथ ही साक्ष्य को मिटाने के लिए दफा 201 भादवि में भी तीन साल सश्रम कारावास की सजा सुनायी है. सभी सजाएं साथ- साथ चलेगी. जहां अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक मो. जहांगीर ने बहस करते हुए न्यायालय से कड़ी से कड़ी सजा की मांग की थी. वहीं बचाव पक्ष से वरीय अधिवक्ता विंदेश्वर ठाकुर ने बहस किया.
क्या था मामला. अभियोजन के अनुसार दहेज हत्या के मामले को लेकर सूचक पिता किशोरी साह द्वारा खिरहर थाना कांड संख्या 7/14 प्राथमिकी दर्ज करायी थी. जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि मृतका रंजीता देवी की शादी आरोपी राम प्रवेश साह के साथ हुई थी.
शादी के बाद मृतका को दहेज के विभिन्न तरीको से ससुराल पक्ष के द्वारा प्रताड़ित किया जाने लगा था. सूचक को 14 जनवरी 2014 को सूचना मिली कि उसकी पुत्री (मृतका) रंजीता देवी को शव को जलाया जा रहा है. सूचक द्वारा आनन- फानन में खिरहर थाने में फोन कर मृतका के ससुराल पहुंची. वहां पहुंचने पर लक्ष्मण साह के बांसबीट्टी में रंजीता देवी को हत्या करने के बाद साक्ष्य को छिपाने के नियत से लाश को जला रहा था. पुलिस द्वारा पहुंचने पर अधजले शव को बरामद किया था. मालूम हो कि उक्त बाद में अभियोजन कि ओर से न्यायालय में नौ गवाहों की गवाही करायी थी.
