चार साल पहले लगी मशीन पर नहीं आये अधिकारी

मधुबनी : बीते चार साल पहले जिस विभाग की स्थापना कर लाखों रुपये खर्च कर दिये गये, चार साल बीत जाने के बाद भी उस विभाग में ना तो अधिकारी की पदस्थापन हुई है और ना ही कर्मी हैं. नतीजा जिस सहूलियत की परिकल्पना की गयी थी वह पूरी तरह से विफल साबित हो गयी […]

मधुबनी : बीते चार साल पहले जिस विभाग की स्थापना कर लाखों रुपये खर्च कर दिये गये, चार साल बीत जाने के बाद भी उस विभाग में ना तो अधिकारी की पदस्थापन हुई है और ना ही कर्मी हैं. नतीजा जिस सहूलियत की परिकल्पना की गयी थी वह पूरी तरह से विफल साबित हो गयी है. हम बात बिजली विभाग में ट्रांसफॉर्मर मरम्मत के लिये बनाये गये टीआरडब्ल्यू विभाग की कर रहे हैं. जानकारी के अनुसार विभाग ने खराब ट्रांसफॉर्मर को ठीक करने के लिये पहल शुरू की.

पर अब तक इस विभाग में ना तो सक्षम अभियंता का पदस्थापन किया गया और ना ही कर्मी. जिस कारण करीब दस लाख की लागत से मंगाये गये सामान आज बेकार हो रहा है.

चार साल पहले बनी थी योजना . नार्थ बिहार पॉवर कंपनी द्वारा ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत को लेकर मधुबनी सब- डिवीजन कार्यालय में टीआर डब्लू विभाग बनाया गया. 2013 में टीआर डब्लू को बनाने का उद्देश्य यह था कि मधुबनी जिला में जितना ट्रांसफॉर्मर जलेगा उसको तत्काल यहां पर सही करवा कर लगाया जा सके.
10 लाख रुपये का सामान हो रहा बरबाद. बिजली विभाग के स्टोर से मिली जानकारी के अनुसार टीआर डब्लू में विभाग द्वारा हीट चेंबर, क्वाइल वाइंडिंग मशीन, आयल फिल्टेरशन मशीन लगाया गया. इन सामान की कीमत करीब 10 लाख रुपये बतायी जा रही है. लेकिन, इन मशीनों में जंग लग जाने के कारण यह मशीन बर्बाद हो रहा है.
विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार ने बताया कि ट्रांसफॉर्मर बनाने में 98 प्रकार के सामान की जरूरत होती है. पर चार साल में . जिसमें अभी तक 26 समान ही आया है. श्री कुमार ने बताया कि डीपीएस एल्यूमीनियम वायर, ब्रास स्टर्ड, क्राफ्ट पेपड़ सहित 26 प्रकार का समान ही विभाग द्वारा उपलब्ध कराया गया है. ट्रांसफॉर्मर बनाने के लिए अभी तक विभाग द्वारा किसी सक्षम अभियंता का नियोजन नहीं किया गया है. जानकार कर्मी नहीं रहने के कारण भी काम प्रभावित हो रहा है. समान उपलब्ध नहीं रहने के कारण पिछले चार साल से काम शुरू नहीं किया गया.
दरभंगा में बनता है ट्रांसफॉर्मर. कार्यपालक अभियंता ने बताया है कि अभी खराब हो रहे ट्रांसफॉर्मर को मरम्मति के लिए दरभंगा भेजा जाता है. ठीक होकर आने पर संबंधित जगहों पर लगाया जाता है. कार्यपालक अभियंता ने बताया कि यहां अगर मरम्मत का काम शुरू हो जाता है तो आसानी से ट्रांसफॉर्मर बन जायेगा.
आज भी दरभंगा से ठीक होकर आता है ट्रांसफॉर्मर

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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