आक्रांत . जिलेभर में पांच हजार से अधिक लोग प्रभावित
मधुबनी : परदेस में काम करने गये लोग रुपये के साथ-साथ सौगात में खतरनाक बीमारी भी घर ला रहे है. इसमें सबसे अधिक मामले एचआइवी के आस रहे हैं. अस्पताल सूत्रों की माने तो पहले तीन माह में ही एचआइवी के 184 नये मरीज चिह्नित किये गये हैं. इसमें अधिकतर वैसे लोग हैं,
जो कुछ साल पहले ही गांव से दिल्ली, पंजाब, कोलकाता या अन्य प्रदेशों में कमाने गये थे. मधुबनी में एचआइवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. वर्तमान में जिले भर में पांच हजार से अधिक एचआइवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या है. इसमें से करीब 4061 मरीजों को दवा दिया जा रहा है.
दी जा रही दवा . एचआइवी पंजीकृत मरीजों की संख्या मार्च 31 तक 5 हजार 18 है. 31 मार्च 2016 तक एआरटी द्वारा 4061 मरीजों काे दवा शुरू किया गया है.
साल दर साल बढ़ रहे मरीज. पिछले तीन साल में करीब तीन हजार एचआइवी पॉजिटिव में बढ़ोतरी देखी जा रही है. हालांकि यह आंकड़ा अस्पताल प्रशासन का है. सूत्रों की मानें तो यह इससे कहीं अधिक है. अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में एचआइवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या 4501 है. जबकि 2013 में मात्र 1984 ही था. साल दर साल एचआइवी मरीज की संख्या बढ़ रही है.
तीन साल में तीन हजार बढ़ी मरीजों की संख्या
साल पुरुष महिला अवयस्क पुरुष अवयस्क महिला कुल
2013 960 861 109 54 1984
2014 1277 1129 145 69 2620
2015 1683 1457 183 87 3410
2016 2142 1819 230 109 4501
माह जनवरी – 55 नये एचआइवी मरीज पंजीकृत
माह फरवरी – 57 नये मरीज
माह मार्च – 72 नये मरीज
तीन माह में कुल 184 मरीज पंजीकृत किये गये हैं.
चल रही योजना पर भी लगा ग्रहण
सरकार द्वारा एचआइवी पॉजिटिव मरीजों के लिये चलाये जा रहे योजना पर भी ग्रहण लगा हुआ है. सरकार ने इन मरीजों के लिये शताब्दी एड्स पीड़ित कल्याण योजना के तहत बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति की ओर से 1500 रुपये प्रति माह दिया जाना था. इस योजना के तहत साल 2015 में मात्र 300 मरीजों को आर्थिक लाभ दिया गया. पर इसके बाद इस मद में राशि आवंटित नहीं होने के कारण मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है. वहीं एड्स मरीजों के बच्चों के परवरिश के लिये सरकार ने परवरिश योजना के तहत 1000 प्रतिमाह देना था. इस योजना के तहत 200 बच्चों को लाभ दिया गया.
नहीं है स्टे होम की सुविधा
मधुबनी सदर अस्पताल स्थित एआरटी सेंटर से मधेपुरा एवं सुपौल जिला भी संबद्ध है. पर इस सेंटर में इन दोनों जिलों से जांच को आने वाले मरीजों को भारी परेशानी होती है. यहां मरीजों के स्टे होम की सुविधा नहीं रहने के कारण इन लोगों के आने जाने में परेशानी होती है. हालांकि एचआइवी मरीजों की जांच के लिये हर पीएचसी में आइसीटीसी जांच केंद्र है. इस बाबत जिला एचआइवी जिला समन्वयक अभिषेक त्रिवेदी ने कहा कि प्रखंड से जांच के बाद जिला में जांच होता है. फिर संबंधित मरीजों का उचित इलाज शुरू किया जाता है.
बाहर से आनेवाले अधिक प्रभावित. जिले में सीडी फोर की जांच एवं मरीजों को मुफ्त में दवा दी जाती है. कहा है कि बाहर से आने वाले मरीजों में यह अधिक संख्या में प्रभावित है. इससे बचाव ही इसका सबसे बेहतर इलाज है.
डाॅ डीएस मिश्रा, नोडल अधिकारी
