भूस्वामियों ने आवासीय जमीन को खेतिहर बनाने का लगाया आरोप
कहा, सितंबर के प्रकाशित गजट के अनुसार जमीन के किस्म का हो भुगतान
नहीं तो करेंगे मुआवजे का बहिष्कार
मधुबनी : एनएच 104 के निर्माण के लिये अधिग्रहण किये गये जमीन के मुआवजे का मामला शुरू होने से पहले ही उलझ गया है. सैकड़ों भूधारियों के आवासीय जमीन को भारत सरकार के 2015 के गजट में खेतिहर बना दिये जाने से भू – धारी आक्रोशित हैं .
भूधारियों ने एलान कर दिया है कि जब तक उन्हें पूर्व के गजट के अनुसार जमीन के किस्म का भुगतान नहीं किया जाता है, तब तक वे लोग मुआवजे का बहिष्कार करेंगे.
डीएम से किया मांग : एनएच 104 में जिन भूस्वामियों का जमीन अधिग्रहण किया गया है एवं उनके किस्म में बदलाव की बात आ रही है, ऐसे दर्जनों किसानों ने सोमवार को जिला पदाधिकारी से मिलकर आवेदन दिया व अपनी मांग रखी. सुबह से ही लौकही थाना के नरहिया मौजा के भूधारी समाहरणालय में जमा हो गये थे. जिला पदाधिकारी के कार्यालय में भूधारियों ने मांग पत्र सौंपा व उनसे सितंबर 12 में प्रकाशित गजट के अनुसार ही जमीन के किस्म का निर्धारण कर मुआवजे भुगतान की मांग की .
मुआवजा बहिष्कार का आंदोलन
भूस्वामियों ने जमीन के किस्म में सुधार नहीं होने पर मुआवजा बहिष्कार करने की बात भी कही है. भूधारियों ने कहा कि सितंबर 2012 में प्रकाशित गजट में जिन किसानों का जमीन आवासीय दर्शाया गया है, उन लोगों के जमीन को साल 2015 में प्रकाशित गजट में भीठ (कृषि) कर दिया गया है. कुछ चुनिंदा व खास लोगों के जमीन को आवासीय दर्शाया गया है.
इन लोगों ने आरोप लगाते हुए कहा है कि कई ऐसे भी जमीन हैं जिनके दोनों ओर के जमीन को आवासीय दर्शाया गया है जबकि बीच वाले जमीन को भीठ बता दिया गया है. भूधारियों ने साल 2012 के गजट व 2015 का गजट भी जिला पदाधिकारी को सौंपा. इस दौरान दिगंबर प्रसाद यादव, गंगा प्रसाद चौधरी, विंदेश्वर प्रसाद यादव, विजय कुमार ठाकुर, जगदीश मंडल, राम कुमार गुप्ता, अजय कुमार साह सहित कई भू स्वामी शामिल थे.
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