समस्या. अस्पताल प्रबंधन को पता नहीं, मरीज परेशान
मधुबनी : सदर अस्पताल सहित पूरे जिले के मरीजों को इन दिनों एंबुलेंस की समस्या से जूझना पड़ रहा है. यदि कहीं दुर्घटना की बात होती है या गंभीर बीमार पड़ें, मरीज को ढूंढे से भी 102 नंबर का एंबुलेंस नहीं मिलता है. निजी एंबुलेंस के सहारे मरीजों को एक चिकित्सालय से दूसरे चिकित्सालय तक जाना पड़ता है. इसमे कई बार कई लोग समय से एंबुलेंस नहीं मिल पाने के कारण मौत के दहलीज तक पहुंच जाते हैं. दरअसल जिला में 27 एंबुलेंस में से इन दिनों 11 एंबुलेंस सर्विस सेंटर में पड़ा हुआ है.
बनने के बाद भी पड़े हैं सर्विस सेंटर में
सर्विस सेंटर में वर्तमान में कुल 11 एंबुलेंस हैं. इसमें से दो एंबुलेंस पिछले सात माह से है, तो अन्य छह माह या उससे कम दिनों से रखा है. खुटौना एवं बाबूबरही पीएचसी का एंबुलेंस जनवरी माह में सर्विस सेंटर में ठीक होने आया. जिसे फरवरी माह में ठीक कर दिया गया पर आज तक उस एंबुलेंस को संबंधित पीएचसी ने नहीं लिया है. इसी प्रकार मधेपुर पीएचसी का एक एंबुलेंस फरवरी माह में सर्विस सेंटर में आया. जिसे
मार्च माह में ठीक कर दिया गया आज तक वह सर्विस सेंटर में ही पड़ा है.
प्रबंधन को पता तक नहीं
सर्विस सेंटर में एक साथ ग्यारह एंबुलेंस छह माह से पड़ा हुआ है. पर अस्पताल प्रबंधन इससे अंजान है. अस्पताल प्रबंधन बताता है कि यह बड़ा गंभीर मामला है. इसकी जानकारी लेकर पहल करेंगे. इन्हें मात्र खुटौना के एक एंबुलेंस के सर्विस सेंटर में होने की जानकारी है. अन्य दस एंबुलेंस के खराब होने एवं सर्विस सेंटर में होने की जानकारी तक नहीं है.
लाखों पूंजी फंसी
इधर, खराब ऐंबुलेंस को ठीक करने में सर्विस सेंटर संचालक का लाखों रुपये पूंजी फंस गया है. सर्विस सेंटर संचालक बताते हैं कि सरकारी एंबुलेंस को गरीब हित में देखते हुए इसे प्राथमिकता के तौर पर लेकर ठीक कर दिया गया. करीब पांच लाख रुपये पूंजी फंसा है. कई बार सभी संबंधित पीएचसी को एंबुलेंस का उठाव करने का आग्रह कर चुके हैं. पर, इसका उठाव नहीं हो रहा है.
गरीबों को हो रही परेशानी
सरकारी एंबुलेंसके खराब होने से गरीब मरीज व उनके परिजन पर आफत आ गयी है. सरकारी एंबुलेंस खराब है, निजी एंबुलेंस लेकर जाने की औकात नहीं है. ऐसे में इधर उधर भटकते हुए अपने मरीज को दम तोड़ते तक देखते है. अस्पताल सूत्रों के अनुसार बीपीएल, गर्भवती, बच्चा, वृद्ध, कालाजार के मरीज, तेजाब कांड के मरीज को मुफ्त में 102 नंबर एंबुलेंस की सुविधा मिल जाती है, जबकि आम लोगों को 9 रुपये प्रति किलोमीटर के दर से एंबुलेंस उपलब्ध होता है.
