मधुबनी : शहर में बिजली की व्यवस्था चरमराते ही जेनेरेटर संचालकों की पौ बारह हो गयी है. अब तो प्राय: हर व्यवसायी जेनरेटर लाईन पर ही पूरी तरह निर्भर होकर रह गये है. कुछ बड़े व्यवसायी के पास भले ही अपना जेनसेट हो पर अधिकांश आज भी निजी जेनरेटर कनेक्शन लेने को बाध्य है. कहने को बिजली विभाग हर दिन 20 से 22 घंटे तक बिजली की आपूर्ति करने का दावा करती है, पर हकीकत में दस से बारह घंटा भी बिजली का लाईन नहीं रहता है. एक आंकड़ों के अनुसार हर साल डेढ़ करोड से दो करोड़ रुपये का कारोबार जेनरेटर संचालक करते हैं
जेनेरेटर के सहारे चल रहा व्यवसाय सालाना डेढ़ करोड़ का कारोबार
मधुबनी : शहर में बिजली की व्यवस्था चरमराते ही जेनेरेटर संचालकों की पौ बारह हो गयी है. अब तो प्राय: हर व्यवसायी जेनरेटर लाईन पर ही पूरी तरह निर्भर होकर रह गये है. कुछ बड़े व्यवसायी के पास भले ही अपना जेनसेट हो पर अधिकांश आज भी निजी जेनरेटर कनेक्शन लेने को बाध्य है. कहने […]

200 रुपये प्रति बल्ब लिया जाता है भाड़ा मिली जानकारी के अनुसार जेनरेटर संचालक एक बल्व का दिन भर लाइन देने के लिये सात रुपये प्रतिदिन लिया जाता है. जबकि एक पंखा का चार्ज 15 रुपये तक है. वहीं कंप्यूटर एवं अन्य सामान जलाने पर भाड़ा अलग से तय होता है. यह भाड़ा चार हजार से लेकर 15 – 20 हजार मासिक तक होता है. कुल मिलाकर एक दुकानदार कम से कम एक बल्व का कनेक्शन हर हाल में लिये हुए है.
वहीं मझोले स्तर का दुकानदार कम से कम तीन बल्व, पंखा लगाये हुए है. नाम ना बताने के शर्त पर जेनरेटर संचालकों ने बताया कि उनका कोई संघ नहीं है. जो रेट निर्धारित करे. बाजार में कई जेनेरेटर संचालक हैं जो अपने अपने हिसाब से और क्षेत्र के अनुसार रेट तय करते हैं. ऐसे में यदि पांच हजार दुकानदार भी एक बल्व लेते हैं तो सालाना कारोबार एक करोड़ से अधिक का होता है.
नहीं रहती है बिजली भले ही लोगों को पैसा देना पड़ता हो और जेनेरेटर संचालकों को हजारों की आमदनी हो रही हो, पर जो स्थिति बिजली विभाग ने की है उससे यदि एक रोज जेनेरेटर संचालक अपनी सप्लाई को बंद कर दें तो बाजार पूरी तरह चरमरा जायेगी. सुबह से रात तक में कभी भी पांच घंटे निर्बाध रूप से बिजली की आपूर्ति नहीं की जाती है. जिस कारण व्यवसायी को जेनेरेटर का लाइन लेना मजबूरी है. कई दुकानदारों ने बताया है कि यदि वे जेनेरेटर का लाइन ना ले तो व्यवसाय ही चौपट हो जायेगा .
क्या कहते हैं अधिकारी
इस बाबत बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार ने बताया है कि जेनरेटर संचालकों के खिलाफ कार्रवाइ करने का कोई आदेश नहीं है. कोशिश की जा रही है कि हर दिन 20 से 22 घंटा बिजली सप्लाई की जाये.
शहर में 12,000 दुकानें
वाणिज्य कर विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बाजार में करीब 7700 निबंधित दुकान है. जबकि गैर निबंधित दुकानों की संख्या करीब पांच हजार से अधिक है. इस प्रकार शहर भर में ही करीब 12000 छोटे बड़े दुकानदार है. जहां पर जेनेरेटर की लाइन सप्लाई अपने स्तर से या फिर संचालकों के माध्यम से हो रही है.