आंगनबाड़ी केंद्र का हाल. बच्चे हो रहे कुपोषित
मधुबनी : जिले भर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र में नामांकित एवं पंजीकृत जीरो से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं धात्रियों को कुपोषण से निजात दिलाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रति महीने करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहें हैं. फिर भी इन केंद्रों में नामांकित बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्रियों की सेहत और सूरत नहीं बदल रही है. आज भी जिले में सैकड़ों बच्चे कुपोषित हैं.
3779 केंद्र स्वीकृत
जिले भर में कुल 3779 केंद्र स्वीकृत हैं. जिसमें 3419 केंद्र संचालित हैं. इन केंद्रों को पंचायत के वार्डों और मुहल्लों में जीरो से छह वर्ष तक के लगभग डेढ लाख बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्रियों को कुपोषण से बचाने के लिए विभाग द्वारा प्रति महीने पोषाहार एवं होमटेक राशन लाभुक को उपलब्ध कराने के लिये पांच करोड़ 36 लाख 78 हजार तीन सौ रुपये संबंधित केंद्रों के सुख- सुविधा समिति के खाते में विमुक्त की जाती है.
इस तरह इन केंद्रों को सिर्फ पोषाहार मद में प्रतिवर्ष 64 करोड़ 41 लाख 39 हजार 6 सौ रुपये खर्च के लिए दिये जाते हैं. जबकि इन केंद्रों पर कार्यरत 3419 सेविका एवं 3253 सहायिका के मानदेय मद में प्रति महीने एक करोड़ 89 लाख 20 हजार 625 रुपये व्यय किये जाते हैं. तमाम खर्चों के बावजूद भी आंनगबाड़ी केंद्रों एवं यहां नामांकित व पंजीकृत बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्रियों की सेहत इसलिए नहीं बदल रही है कि अधिकांश केंद्र कागजों पर ही संचालित किये जा रहे हैं.
नहीं हो पा रही माॅनीटरिंग
प्रभारी कार्यक्रम पदाधिकारी पंकज कुमार गुप्ता ने बताया है कि अधिकारियों की कमी के कारण सही से माॅनीटरिंग नहीं हो पा रही है. जिस कारण परेशानी हो रही है.
