आम से सजा बाजार, केिमकल िबगाड़ रहा मजा

मधुबनी / पंडौल : शहर के मुख्य सड़क व बाजार इन िदनों फलों के राजा से पटा है. पर बाजार में बिक रहे ज्यादातर आम बाहर से आ रहे हैं. िजनके कारण इसमें िमठास नहीं है. इसका एक कारण केमिकल से पकाया जाना भी है. आम आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र आदि राज्यों से आ रहे हैं. […]

मधुबनी / पंडौल : शहर के मुख्य सड़क व बाजार इन िदनों फलों के राजा से पटा है. पर बाजार में बिक रहे ज्यादातर आम बाहर से आ रहे हैं. िजनके कारण इसमें िमठास नहीं है. इसका एक कारण केमिकल से पकाया जाना भी है. आम आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र आदि राज्यों से आ रहे हैं. इन राज्यों से यहां के आम के कारोबारी कच्चा आम मंगवाते हैं . इन कच्चे आमों को कार्बाइड के जरिये पकाया जा रहा है. कार्बाइड से पके आम सेहत के लिए नुकसानदेह होते हैं.

मधुबनी, पंडौल, सकरी, सरिसबपाही व देहाती देहाती क्षेत्रों में भी गलत ढंग से आम पकाये जा रहे हैं. लोगों का कहना है कि पेड़ की डालों पर कुदरती तौर से पके फल सबसे सेहतमंद होते हैं, मजबूरी की सूरतेहाल में पेपररैप और भूंसा पुआल में रख कर पकाने का तरीका बेहतर है. पेपर रैप के तरीके से फलों को कागज में लपेट कर पकाया जाता है. लेकिन इन दिनों ज्यादातर फलों के व्यापारी कैल्शियम कार्बाइड से आमों को पका कर बेच रहे हैं.

कार्बाइड से फल पक कर जल्दी तैयार हो जाते हैं. देखने में ये ताजे ताजे पीले पीले लगते हैं. मगर कार्बाइड से निकलने वाली एसीटिलीन गैस जहरीली होने की वजह से सेहत पर बुरा प्रभाव डालती है. एसीटिलीन गैस जब पानी में घुलती या इसके संपर्क में आती है तो रासायनिक क्रिया के कारण विनायल अल्कोहल और एसीटल्डिहाइड रसायन बनते है . ये दोनों ही शरीर के लिए नुकसानदेह हैं. यह वही कैल्शियम कार्बाइड है जिसका इस्तेमाल वेल्डिंग करनेवाले ऑक्सीजन के साथ लोहे को पिघलाने में करते हैं. इसके ताप का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है. इस संबंध में डॉ. मो जुनैद बताते हैं कि कार्बाइड से पकाने पर फलों के खनिज नष्ट हो जाते हैं. ऐसे फल शरीर में गर्मी उत्पन्न करते हैं आंखों पर सीधा असर पड़ता है. नाड़ी की गति को तेज करते हैं स्वास्थ्य पर इनका बुरा प्रभाव पड़ता है. कार्बाइड से पके फलों को लगातार खाने से कैंसर, लकवा, जिगर की बीमारियां, विकलांगता आदि रोग हो सकते हैं.

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