धड़ल्ले चल रहा दवाओं का काला धंधा

मधुबनीः जिले में दवा दुकानों में मिल रहे एक्सपायरी व अन्य आपत्तिजनक दवाओं ने जिले में दवा दुकानों की कु व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है. हाल के दिनों में जिले के एक दवा दुकान में किये गये छापेमारी के दौरान फिजिशियन सैंपल भी मिले हैं. इस बात की आशंका जाहिर की जा […]

मधुबनीः जिले में दवा दुकानों में मिल रहे एक्सपायरी व अन्य आपत्तिजनक दवाओं ने जिले में दवा दुकानों की कु व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है. हाल के दिनों में जिले के एक दवा दुकान में किये गये छापेमारी के दौरान फिजिशियन सैंपल भी मिले हैं.

इस बात की आशंका जाहिर की जा रही है कि कुछ दलालों व दवा दुकानदारों की सांठगांठ से फिजिशियन सैंपल को बेचा जा रहा है. जबकि सैंपल पर नॉट फॉर सेल लिखा रहता है. आशंका व्यक्त की जा रही है कि कई सब स्टैंडर्ड और मिलावटी दवा का व्यापार भी जिले में औषधि प्रशासन की आंख में धूल झोंक कर चल रहा है. यह भी आशंका प्रबल है कि दवा दुकानदार को जिन दवाओं को बेचने का लाइसेंस मिला है उसके अलावे भी वे कई अन्य दवाओं को चोरी छिपे बेच रहे हैं. कई गैर लाइसेंसी दवा दुकान भी जिले में चल रहे हैं. नये नये ब्रांडेड दवाओं की जिले में बाढ़ आ गई है. तरह तरह की एक ही कंपोजिशन की दवा मरीजों को प्रेसक्राइब की जा रही है.

जिला औषधि नियंत्रण प्रशासन का कहना है कि 348 तरह की दवाओं की कीमत कम कर दी गयी है. पर अभी भी कई दवा दुकानों में ऊंची कीमत पर बिक रही है. ब्लड पेसर की दवा एटेनएम की कीमत तो पहले से भी अधिक हो गई है. जो दवा 65 रुपये में मिलती थी वह 72 रुपये में मिल रही है. ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑथोरिटी ने उन सभी 348 दवाओं के पुराने स्टॉक को हटाने और नया स्टॉक वाला दवा लाने का निर्देश भी जारी कर दिया है. पर इसका अनुपालन नहीं हो रहा है. जिले में नरेश कुमार, राजेश कुमार, उपेंद्र पंडित, सुनील कुमार विभिन्न अनुमंडलों में ड्रग इंस्पेक्टर हैं. डीएलओ के पद पर रवींद्र कुमार हैं जो दरभंगा के प्रभार में भी हैं. इन ड्रग इंस्पेक्टरों की अनुशंसा पर ही किसी दवा दुकानदार की अनुज्ञप्ति निलंबित या रद्द की जा सकती है.

कई दवा दुकानदार समय से अपने निबंधन लाइसेंस का नवी करण नहीं कराते हैं और मनमाने ढ़ंग से दवा बेचते हैं. इन दिनों जिलों के दवा दुकानों में चोरी छिपे कामोत्तेजक दवाएं भी बेची जा रही है. शहर में कई कास्मेटिक्स के दुकानों में नकली बॉडी सोप, लोशन, फेस वाश, क्रीम आदि कई सौंदर्य प्रशासन की बिक्री जोरों पर है. हाल ही में एक कंपनी के प्रतिनिधि ने शहर में नकली सौंदर्य प्रसाधन सामग्री को पकड़ा था. ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत ड्रग इंस्पेक्टरों को कास्मिटक की दुकानों का भी निरीक्षण करना है. जिले में सिर्फ एक या दो दुकानों पर छापामारी करके आपत्तिजनक और एक्सपायरी दवा पर रोक नहीं लगाया जा सकती, कहना है जिले के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का. उनका कहना है कि जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के सभी दवा दुकानों पर छापेमारी होनी चाहिये ताकि नकली, मिलावटी और सब स्टैंडर्ड दवा मिलने की आशंका नहीं रहे. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की मांग है कि सभी दवा दुकानों में उपलब्ध दवाओं की सूची और दवा का दाम प्रदर्शित रहना चाहिये. इससे भारत सरकार द्वारा दी गई 348 दवाओं पर छूट का लाभ मरीजों को मिल सके. उन्होंने इस बात भी ध्यान देने की मांग की है कि कहीं अधिक कमीशन के लोभ में कुछ स्वार्थी तत्व घटिया दवा तो मरीजों को नहीं दे रहे हैं.

सभी लाइसेंसी दवा दुकानों की सूची भी जारी करने की लोगों ने मांग की है जिससे आम जनता को यह पता चल सके कि कौन दवा दुकान लाइसेंसी और कौन दवा दुकानदार किस किस तरह की दवा बेच सकता है इसे भी प्रदर्शित करने की मांग की जा रही है. डीएलओ और ड्रग इंस्पेक्टर इस काम में कहां तक सफल हो पायेंगे यह तो आने वाला समय ही बतायेगा.

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