चीनी मील चालू करने का हर आश्वासन खोखला

मधुबनीः लोहट चीनी मिल में लिपिक के पद पर पूर्व में कार्यरत किशोरी ठाकुर धीरे धीरे मौत की ओर बढ़ते जा रहे है. हर दिन ऑपरेशन की आस में बेड पर पड़े कैंसर पीड़ित किशोरी के आशा की किरण अपने बकाये राशि पर टिकी हुई है. डॉक्टरों के मुताबिक यदि उनका ऑपरेशन किया जाय तो […]

मधुबनीः लोहट चीनी मिल में लिपिक के पद पर पूर्व में कार्यरत किशोरी ठाकुर धीरे धीरे मौत की ओर बढ़ते जा रहे है. हर दिन ऑपरेशन की आस में बेड पर पड़े कैंसर पीड़ित किशोरी के आशा की किरण अपने बकाये राशि पर टिकी हुई है. डॉक्टरों के मुताबिक यदि उनका ऑपरेशन किया जाय तो वे फिलहाल जीवन और मृत्यु के जंग में मृत्यु को पराजित कर नया जीवन पा सकते है.

लेकिन इसके लिये उन्हें ऑपरेशन में करीब छह लाख रुपये खर्च होगा बेड पर पड़े किशोरी ठाकुर कई बार लोहट चीनी मील प्रबंधन से अपने बकाये राशि का भुगतान करने की गुहार लगा चुके है. लेकिन राशि का भुगतान नहीं किया जा सका है. और राशि के अभाव में उनका इलाज नहीं हो पा रहा है. यह हाल चीनी मील के सैकड़ों कर्मचारी अर्थाभाव के कारण ना सिर्फ गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो इलाज के लिये दर दर भटक रहे है. बल्कि कई कर्मचारी की मौत तक हो चुकी है.

अब आरपार की लड़ाई

लोहट चीनी मिल प्रबंधन द्वारा अपने बकाये राशि का 15 दिन के अंदर भुगतान नहीं किये जाने की स्थिति में कैंसर से पीड़ित किशोरी ने बिहार स्टेट सुगर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक को आत्मदाह करने की चेतावनी दे दी है. किशोरी के इस चेतावनी ने जहां इनके परिजन व अन्य परिचितों की नींद उड़ा दी है.

वहीं मिल में कार्यरत परेशानी से जूझ रहे कर्मियों की दर्द को भी बयां करती है कि वर्ष 2008 में इन्हें सेवा मुक्त कर दिया गया था. उस वक्त वेतन मद का करीब छह लाख रुपये बकाया है. जिसके आस में हर दिन परिजन कहीं से कर्ज लेकर इलाज कराये. लेकिन अब ना तो कहीं कर्ज मिल रहा है और ना ही जमीन जायदाद बची है. जिसे बेच कर इलाज करा सके.

15 साल में 500 की मौत

विगत 15 साल में चीनी मिल में कार्यरत करीब 500 कर्मचारियों की मौत हो चुकी है. प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2013 में ही करीब 50- 60 कर्मचारी अर्थाभाव के कारण बीमारी से ग्रस्त हो मौत की गोद में समा चुके हैं. जबकि किशोर ठाकुर, मिथिलेश झा, राम विलोचन मिश्र, गंगा राम यादव सहित कई अन्य मौत के दहलीज पर खड़े हैं.

सीएम का वादा भी फेल

चीनी मिल बंद होने के कारण यहां के किसानों की कमर टूट गयी है. कभी हजारों लाखों में खेलने वाले किसान व कर्मचारी मिल के बंद होने से पैसे पैसों को मोहताज हो गये है. इस मिल को चालू करने के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सारे वायदे विफल साबित हो चुके हैं. वर्ष 2005 में चुनावी सभा के दौरान पंडौल में सीएम ने कहा था अगर आपके सहयोग और समर्थन से हजारी सरकार बनी तो अगले एक साल में बंद चीनी मिल को चालू किया जायेगा. किसान, मजदूर व कर्मियों के बकाये भुगतान सुनिश्चित होगी. किसी को भी मरने नहीं दिया जायेगा. जिसकी उपेक्षा हर सरकार आज तक करती रही है. लेकिन मिल चालू होने की बात तो दूर अब तक किसान, मजदूर व कर्मियों के बकाये राशि का भुगतान करने में भी सरकार विफल साबित रही है.

सरकार जिम्मेवार : प्रफुल्ल

श्रमिक संघ के नेता प्रफुल्ल चंद्र झा ने बताया कि मिल के मामले में सरकार विफल रही है. इसके लिए पूरी तरह से सरकार को ही माना जायेगा. सूबे की वर्तमान सरकार निर्थक कार्यों में करोड़ों व्यय करती रही है. लेकिन जिससे क्षेत्र का विकास संभव है. रोजी रोटी की समस्या दूर हो सकती है. उसे लेकर गंभीर व ठोस पहल कभी नहीं किया गया.

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