घूमते रहते हैं मवेशी, हमेशा आती है बदबू
टूटने लगे हैं पार्क में लगे झूले
मधुबनी : गंगासागर काली मंदिर परिसर के उत्तर अवस्थित चिल्ड्रेन पार्क में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थी. यहां बच्चे झूला व क्रिकेट का आनंद उठाते थे. वहीं, आज यह पार्क अगल-बगल के मोहल्लों का डस्टबीन बन गया. अब इसमें बच्चों की जगह मवेशी घुमते रहते हैं.
हाल यह है लोग अब इस पार्क में जाना तो दूर इसके पास से भी गुजरना मुनासिब नहीं समझते. इसके आने वाली बदबू से हमेशा बीमार होने की आशंका बनी रहती है. इसके कारण हाल यह कि बच्चों को खुलने के लिए जगह नहीं मिल पा रही है. वह घर में ही रहने को ही मजबूर हैं.
कभी आकर्षण का केंद्र था पार्क
वार्ड नंबर-7 में अवस्थित चिल्ड्रेन पार्क अस्सी के दशक में शहर का आकर्षण का केंद्र था. बच्चे अपने माता पिता के साथ पार्क में घूमने जाने के लिए मचलने रहते थे. पार्क में गदेदार मखमली घास हुआ करती था. अभिभावकों को बैठने के लिए सिमेंटेड आराम देह कुरसी का निर्माण कराया गया था.
बच्चों को खेलने के लिए झूला एवं कई अन्य सामान को लगाया गया था. इस पर बच्चे सुबह व शाम में खेला करते थे. पार्क के ठीक बगल में अवस्थित काली मंदिर में लोग दर्शन करने आते व पार्क की सुंदरता को देखकर वहां बैठ जाते थे. पार्क के ठीक सामने गंगासागर का विशाल तालाब था. शहर के भीड़ भार से अलग स्वच्छ हवा से परिपूर्ण यह पार्क पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी काफी अच्छा था.
पार्क में लगा कूड़ा का अंबार
धीरे-धीरे प्रशासनिक उदासीनता व लोगों की उपेक्षा के कारण रख रखाव के अभाव में पार्क उजड़ता चला गया. पार्क के उत्तरी साइड से दीवार ढहने के कारण इसमें जानवरों का प्रवेश शुरू हो गया.
टूटे हुई दीवार से लोगों ने पार्क में कूड़ा कचरा फेंकेने शुरू कर दिये. पार्क अगल-बगल की कॉलोनियों का कचरा फेंके जाने का स्थान बन गया. अब हाल यह है कि इसमें लगाये गये झूले टूटने लगे हैं.
बना चारागाह
चिल्ड्रेन पार्क कालांतर में पशुओं का चारागाह बन गया. इसके टूटे हुई दीवार से होकर सुअर, कुत्ता व गाय का आरामगाह बन गया चारागाह. इस ओर न तो प्रशासनिक अधिकारियों का ही ध्यान गया और न ही जमीन के ट्रस्टियों का. पार्क की दुर्दशा पर लोग चर्चा करते रहे पर इसके सुधारने की दिशा में किसी ने ठोस पहल नहीं की.
वर्ष 1985 में हुआ था पार्क का जीर्णोद्धार
चिल्ड्रेन पार्क के बगल में अवस्थित विनोदानंद झा कॉलोनी के वयोवृद्ध हरिश्चंद्र झा ने बताया कि चिल्ड्रेन पार्क की लगभग 12 कट्ठे की भूमि दरभंगा के महारानी द्वारा बनाये गये ट्रस्ट का है.
1985 में तत्कालीन जिला
पदाधिकारी ने इस पार्क का जिर्णोद्धार किया था. जब तक उक्त डीएम की पदस्थापना जिले में हुई तब
तक पार्क की शोभा देखते ही बनती थी, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद प्रशासनिक उदासीनता व ट्रस्टी के उपेक्षा के कारण यह पार्क बदहाल होता गया.
