मधुबनीः मरीजों के लिए सरकारी इलाज की व्यवस्था तो है पर इसका लाभ लेना मुश्किल है. चिकित्सक व कर्मी की मनमर्जी की भेंट यह व्यवस्था चढ़ गयी है. यह हाल अधिकतर ग्रामीण अस्पतालों की है. सुविधा है तो चिकित्सक नहीं,चिकित्सक है तो सुविधा नदारद. कुछ ऐसा ही बयां कर रहा भगवतीपुर का स्वास्थ्य केंद्र. जहां चिकित्सक नदारद रहते हैं. वहीं इलाज की व्यवस्था एएनएम के भरोसे हैं. यहां भवन बेहतर हालत में है, पर चिकित्सा की हालत खराब.
कहते हैं स्थानीय लोग
इस बावत लोगों ने बताया कि 11 बजे के बाद ही ओपीडी में चिकित्सक आते हैं. दरअसल,इस स्वास्थ्य केंद्र पर एक चिकित्सक, दो एएनएम कुमारी सुमित्र व ललिता कुमारी,एक लैब टेक्निशियन महेश कुमार,दो चतुर्थ वर्गीय कर्मी भरत मुखिया व कासी देवी नियुक्त है. लेकिन केंद्र पर केवल एक कर्मी ललिता उपस्थित मिली. बाद में आये महेश कुमार ने बताया कि यहां टीबी की जांच की व्यवस्था नहीं है. हालांकि इनकी नियुक्ति इसकी जांच के लिये ही यहां हुई है. प्रसूता वार्ड व अन्य स्थानों पर फैली गंदगी यह बता रहा थी कि यहां की सफाई व्यवस्था भगवान भरोसे हैं. ग्रामीण सूरज,मो.मोस्तकीम ,अनीस अहमद,रेहाना परवीन आदि ने बताया कि यहां इलाज की बदतर हालत के बारे में बात करने पर कहा जाता कि हमें जब आना होगा आयेंगे.
कहते हैं चिकित्सा प्रभारी
यहां पदस्थापित चिकित्सक डा. फखरे आलम ने फोन पर बताया कि वे हमेशा समय पर तो आते हैं. आज तबीयत खराब हो गयी है इसलिए छुट्टी ली है. वहीं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. जे. के. महतो ने बताया कि इनकी छुट्टी का कोई आवेदन या अन्य कोई जानकारी नहीं मिली है. अनुपस्थिति को लेकर इनसे स्पष्टीकरण पूछा जायेगा. ओपीडी में इनकी ही ड्यूटी है. अन्य कर्मियों की अनुपस्थिति की बाबत चिकित्सा प्रभारी ने बताया कि सभी संबंधित पदाधिकारियों व कर्मियों से स्पष्टीकरण पूछा जायेगा.
कहते हैं मरीज
स्वास्थ्य केंद्र पर अपने पोते आदिल हुसैन की इलाज करने पहुंचे अब्दुल कय्यूम ने बताया कि ओपीडी खुलने का कोई समय नहीं है. 10 बजे के बाद ही इलाज शुरू हो पाता है. इलाज को पहुंचे सीता देवी,प्रियंका देवी,ललिता देवी, मो.असलम, मो.मोकरम ने बताया कि चिकित्सक के आने के कोई समय नहीं है. आना न आना इनकी मर्जी पर है. जब ये नहीं आतें तो एएनएम से ही दवा ले लेती है. वहीं एएनएम ललिता ने बताया कि रजिस्टर में नाम लिख दवा दे देती है.
इस तरह यहां की इलाज की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है. इधर ग्रामीणों ने यहां की हालत को लेकर डीएम व अन्य वरीय अधिकारी को ज्ञापन सौंप कर कार्रवाई की मांग की है. अब देखना है कि इस हालत में कब सुधार हो पाता है. फिलहाल,प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के आश्वासन के बाद उम्मीद जगी है.
