मधुबनीः विभाग की गलत नीति की वजह से कृषि विभाग द्वारा रबी फसल में चलायी जाने वाली योजना के पूरा होने की संभावना पर प्रश्न चिह्न् लगता जा रहा है. एक ओर सरकार रबी फसल में गेहूं के अधिक उपज के लिये पंक्ति में ही शक्ति है योजना चलाने का निर्देश विभाग को दिया है. जिसके लिये श्री विधि प्रत्यक्षण, गैर प्रत्यक्षण, जिरो टिलेज प्रत्यक्षण एवं गैर प्रत्यक्षण का लक्ष्य भी दिया गया है. लेकिन यह लक्ष्य शायद ही पूरा हो सकेगा.
कृषि निदेशालय द्वारा जिला को स्वी विधि एवं जिरो टिलेज से गेहूं प्रत्यक्षण का लक्ष्य दिया गया है. लेकिन यह लक्ष्य कैसे पूरा हो सकेगा. इसके लिये विभाग ने कोई ठोस पहल नहीं कर सकी है. स्वी विधि से गेहूं की बुआई डिबलर मशीन से की जाती है. जबकि जिरो टिलेज से बुआई भी मशीन से ही की जाती है. लेकिन विगत अप्रैल माह से ना तो किसान मेला का आयोजन किया गया है और ना ही कृषि यंत्र पर अनुदान दी दिया जा रहा है. ऐसे में बिना यंत्र के बुआई नहीं हो सकेगा और विभाग द्वारा दिया गया लक्ष्य भी पूरा नहीं हो सकेगा. इधर विगत दिनों किसानों को कई यंत्र दे कर अनुदान के लिये भटक रहे यंत्र विक्रेता अब विभाग के आश्वासन पर किसी भी कीमत पर किसानों को अनुदान पर राशि उपलब्ध कराने की स्थिति में नहीं है. सूत्रों के अनुसार ऐसा माना जा रहा है कि विभिन्न कृषि यंत्र पर इस वर्ष अनुदान की राशि भी कम होने की संभावना व्यक्त की जा रही है.
गेहूं की नयी तकनीक से खेती को अधिक प्रभावी व अत्यधिक उपज के लिये कोनोवीडर नामक यंत्र आवश्यक है. कृषि परामर्शी एवं प्रगतिशील किसानों का मानना है कि बिना कोनोवीडर यंत्र चलाये स्वी विधि से गेहूं की खेती का औचित्य ही समाप्त है. लेकिन यह विभाग के गलत नीति ही है कि स्वी विधि से खेती का लक्ष्य तो दिया गया है लेकिन किसानों को कोनोवीडर कैसे प्राप्त होगा यह स्पष्ट नहीं किया गया है. ऐसी स्थिति में एक ओर जहां विभाग का लक्ष्य पूरा होने की संभावना कम हो गयी है वहीं किसान एवं विभागीय अधिकारी भी दुविधा में फंसे हुए हैं. विभाग के निर्देशानुसार इस रबी फसल में जिन किसानों के पास जिरो टिलेज मशीन है उनको प्रत्यक्षण का लाभ नहीं दिया जायेगा. प्राप्त जानकारी के अनुसार चालू रबी फसल में 9050 एकड़ में जिरो टिलेज मशीन से गेहूं की बुआई का लक्ष्य प्राप्त हैं. वहीं 3200 एकड़ में प्रत्यक्षण किया जायेगा. किसानों को एक एकड़ के प्रत्यक्षण के लिये 1250 रुपये की सहायता दी जायेगी. इसी प्रकार स्वी विधि से 18 हजार एकड़ में खेती किये जाने का लक्ष्य मिला है जबकि 8 हजार एकड़ में प्रत्यक्षण किया जाना हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
इस बाबत जिला कृषि पदाधिकारी केके झा ने बताया है कि अब तक मेला लगाने या कृषि यंत्र पर अनुदान के बाबत विभाग से कोई दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है. निर्देश मिलने के बाद ही कोई पहल हो सकेगी.
