मधुबनीः 25 नवंबर 2011 को एलआइए ने गुप्त सूचना के आधार पर इंडियन मुजाहिद्दीन के प्लान मेकर अफजल को मधुबनी के भऔड़ा से गिरफ्तार किया था. इसके गिरफ्तारी से सुरक्षा एजेंसी को कई अहम सुराग हाथ लगे थे. जांच के दौरान अफजल ने ही सबसे पहले इंडियन मुजाहिद्दीन की असली ताकत से अवगत कराया था. उसने बताया कि कैसे आइएम एक कई अंडर कवर लाइन को तैयार रखती है.
साथ योजना तैयार करने और उसे अमलीजामा पहनाने में किन किन लोगों की अहम भूमिका होती है. कैसे योजना के लिये रंगरूटों का चयन किया जाता रहा और उसका इस्तेमाल होता था. इसके अलावे अफजल ने एनआइए अधिकारियों के सामने ही नरेंद्र मोदी को नहीं मार पाने का इजहार किया था. खुफिया सूत्रों ने बताया कि अफजल को इसका खासा मलाल था. पकड़े जाने का उसे अफसोस नहीं था. पर नरेंद्र मोदी पर हमला नहीं कर पाने की कसक थी. उसने जांच अधिकारियों को बताया कि आइएम के हिट लिस्ट में मोदी रहे है. वर्ष 2010 से आइएम मादी को मेन टारगेट बनाकर चल रही है.
पर मोदी की कड़ी सुरक्षा इंतजाम होने के कारण इनलोगों का मनसूबा सफल नहीं हो सका है. खुफिया सूत्रों का दावा है कि अफजल के आने बाद आइएम ने अपने इस टारगेट को अंजाम देने की छटपटाहट रहीं. कुछ कोशिश भी हुए, पर कामयाब नहीं हो सका. माना जाता है कि अहमदाबाद ब्लास्ट इसी की एक कड़ी हो सकती है. सूत्रों का यह भी कहना है कि मधुबनी में अफजल की गिरफ्तारी आइएम के लिये एक बड़ा झटका था. क्योंकि आइएम के लिये अफजल प्लान मेकर माना जाता रहा. इसके पकड़े जाने के तुरंत बाद से सेकेंड लाइन तैयार करने की कवायद शुरू हो गयी थी. इसके लिये खासकर बंगलादेशी शरणर्थी पर फोकस किया गया. उस वक्त इसकी गिरफ्तारी यासीन भटकल को मिली थी.
पर बाद में बकाव ने इसका मोर्चा संभाला था. उसी सिलसिले में तौहीर, तहसीन व मोनू को जोड़ा गया था. दरअसल, मधुबनी व दरभंगा मॉडयूल पर आइएम का फोकस रहा है. ताकि सुरक्षा एजेंसी की आंखों में धूल झोंका जा सके. हालांकि अब इंतजार इस बात की है कि सुरक्षा जांच एजेंसी पटना ब्लास्ट को लेकर तहसीन से कितनी राज उगलवा पाती हैं?
