मधुबनी जिले में दस विधानसभा सीटें हैं, जिनके लिए पांचवें और आखिरी चरण में पांच नवंबर को मतदान होना है. इन सीटों पर चुनाव प्रचार परवान पर है. पिछले चुनाव की बात करें, तो जदयू के पास फुलपरास, लौकहा, झंझारपुर व हरलाखी सीटें थी, जबकि भाजपा ने मधुबनी, खजाैली व बेनीपट्टी में जीत दर्ज की थी. राजद को बिस्फी, राजनगर व बाबूबरही सीट पर जीत मिली थी. इस बार बदले हुए राजनीतिक समीकरण ने चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है. बागी इस बार भी राजनीतिक दलों को परेशान कर रहे.
मधुबनी
गंठबंधनों के बीच सीधी लड़ाई
पिछले चुनाव में यह सीट भाजपा को मिली थी. उसके सीटिंग एमएलए रामदेव महतो इस बार भी उसके उम्मीदवार हैं. महागंठबंधन ने समीर कुमार महासेठ को मैदान में उतारा है. ऐसा माना जा रहा है कि मुख्य मुकाबला इन्हीं दोनों के बीच होगा. लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने के लिए माले के ध्रुव नारायण कर्ण चुनाव मैदान में हैं. राजद में रहे पूर्व विधायक नैय्यर आजम भी इस बार सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.
राजनगर (सु.)
विधायक व पूर्व विधायक में लड़ाई
महागंठबंधन से राजद के रामअवतार पासवान यहां उप चुनाव में जीते थे. उन्हें काम करने के लिए एक साल का समय मिला. वह इस बार भी राजद के उम्मीदवार हैं. भाजपा ने पूर्व विधायक रामप्रीत पासवान को मैदान में उतारा है. माना जा रहा है मुख्य मुकाबला इन्हीं दोनों के बीच है. सड़क व सिंचाई जैसी बुनियादी समस्या से जूझ रहे यहां के लोग किसे प्रतिनिधि चुनते हैं, यह आठ नवंबर को ही पता चलेगा.
बेनीपट्टी
पुराने प्रतिद्वंद्वी फिर आमने-सामने
बेनीपट्टी सीट ऐसी है, जहां पुराने प्रतिद्वंद्वियों के ही बीच टक्कर है. यहां महागंठबंधन व एनडीए के प्रत्याशी पिछले चुनाव में भी आमने सामने थे. तब भी सीपीआइ के कृपानंद झा आजाद ने लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की थी. इस बार भी वह मैदान में हैं. वरिष्ठ कांग्रेस स्व. युगेश्वर झा की बेटी भावना झा पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाना चाहती हैं, जबकि भाजपा के विनोद नारायण झा फिर से बेनीपट्टी का प्रतिनिधित्व चाहते हैं.
हरलाखी
नये-पुराने के बीच होगी टक्कर
हरलाखी सीट पर इस बार दोनों बड़े गंठबंधनों ने नये प्रत्याशियों पर दावं लगाया है. पिछली बार यहां से जदयू के शालिगराम यादव चुनाव जीते थे, लेकिन इस बार यह सीट कांग्रेस के पास चली गयी है. उसने मो शब्बीर अहमद को टिकट दिया है, जबकि एनडीए से रालोसपा ने बसंत कुशवाहा को उतारा है. इन दोनों की टक्कर पहले पूर्व विधायक रामनरेश पांडेय से मानी जा रही है, जो सीपीआइ के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.
खजौली
बाबूबरही
बगावत बिगाड़ सकती है खेल
पिछले चुनाव में राजद के टिकट पर जीते उमाकांत यादव इस बार बागी हो चुके हैं. जदयू के पाले में इस सीट के जाने से नाराज उमाकांत ने सपा का दामन थाम लिया और चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि एनडीए में यह सीट लोजपा को मिली है, जिसने जदयू से विधान पार्षद रहे विनोद कुमार सिंह को टिकट दिया है. इस तरह से इस सीट पर बगावत खेल बिगाड़ सकती है. फिलहाल सभी दल गोलबंदी में जुटे हैं.
झंझारपुर
सीधी लड़ाई में जोड़-घटाव
पिछले चुनाव में जदयू के टिकट पर जीते नीतीश मिश्र अब भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं. मंत्री रह चुके नीतीश मिश्र को हम का नेता माना जाता है, जिन्हें भाजपा ने अपना टिकट दिया है. इनके सामने महागंठबंधन से गुलाब यादव हैं. कोशी का गेट-वे कहे जानेवाले इस इलाके में चुनावी रंगत जोरों पर है. राजनीतिक समीकरण में जोड़-घटाव का खेल चल रहा है, जबकि वोटर चुप्पी साधे हुए हैं.
फुलपरास
सीपीआइ बना रही लड़ाई का त्रिकोण
इस सीट पर गुलजार देवी फिर से जदयू केटिकट से चुनाव लड़ रही हैं, जबकि एनडीए में यह सीट रामसुंदर यादव को मिली है. सीपीआइ के उमेश राय मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में हैं, लेकिन लड़ाई महागंठबंधन व एनडीए के बीच मानी जा रही है. ग्रामीण इलाका माना जानेवाला फुलपरास बाढ़ तथा सड़क व सिंचाई की कमी की त्रसदी से हर साल जूझता है. इस के बीच वोटर अब तक चुप हैं.
लौकहा
चुनावी समर में उतरे नये चेहरे
पिछले चुनाव में लौकहा सीट से जीते सतीश साह का टिकट इस बार कट गया है. वह प्रदेश सरकार में मंत्री रहे हरि साह के बेटे हैं. पार्टी के आदेश को सिर आंखों पर रखते हुए सतीश चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. उनकी जगह पर लक्ष्मेश्वर राय जदयू के प्रत्याशी हैं, जबकि भाजपा ने प्रमोद प्रियदर्शी पर दावं लगाया है. निर्दल दिनेश प्रसाद साह की चर्चा भी इलाके में हो रही है. वोटर किसे पसंद करते हैं. यह बात पांच नवंबर को तय हो जायेगी. यह कृषि प्रधान इलाका है और किसानों के मुद्दे पर ही चुनाव लड़ा जा रहा है. वोटों के ध्रवीकरण में दलों के पसीने छूट रहे हैं. मुकाबला नये चेहरों में हैं.
बिस्फी
प्रत्याशियों को परखने में लगे हैं वोटर
राजद के डॉ फैय्याज अहमद पिछले चुनाव में इस सीट से जीते थे. पार्टी ने फिर उन पर भरोसा जताया है, जबकि एनडीए के टिकट बंटवारे में यह सीट रालोसपा के खाते में गयी है, जिसने मनोज कुमार यादव को टिकट दिया है, जबकि निर्दलीय हरि भूषण ठाकुर लड़ाई को त्रिकोणीय करना चाहते हैं. सिंचाई व सड़क की समस्या से जूझ रहे इलाके के लोग वोट देने की तैयारियों में जुटे हैं. वोटरों को उनके वायदों के तराजू पर परख रहे हैं. ऐसे में परिणाम क्या आता है, इसके बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन मुकाबला दिलचस्प है और जब गिनती होगी, तभी यहां के वोटरों के मत का पता चलेगा.
