ग्रिड से मिल रही आवश्यकता अनुरूप बिजली, फिर भी
मधुबनी : नार्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन एवं जेकेसी के बीच हुए अनुबंध व पेंच का खामियाजा आम उपभोक्ता उठा रहे हैं. विभाग ने जेकेसी कंपनी के साथ जर्जर तार व जले ट्रांसफॉर्मर बदलने का अनुबंध तो कर लिया पर यह अनुबंध अब उपभोक्ताओं को भारी पड़ रहा है. स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पावरग्रिड से आवश्यकता के अनुरूप बिजली मिलने के बाद भी लोगों को दिन व रात भर हाथ वाला पंखा झेलना पड़ता है.
घर में खाने का सभी सामान रहने के बाद भी जिंदगी फाकाकशी में बीतने जैसी बात हो गयी है. दरअसल नार्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने शहर के जर्जर तार व ट्रांसफॉर्मर को बदलने व नये ट्रांसफॉर्मर बदलने का अनुबंध जेकेसी कंपनी के साथ किया था. पर निर्धारित समय के बीत जाने के बाद भी अब तक लक्ष्य के पांच फीसदी तक की मंजिल तय हो सकी है.
आखिर बिजली जाती है कहां
जिस प्रकार का आंकड़ा विभाग के द्वारा मिल रहा है, उससे यह सोचने पर लोग मजबूर हो गये कि जो बिजली पावरग्रिड से सब स्टेशन को मिल रही है आखिर वह जाती कहां है. विभाग 24 घंटे लोगों को बिजली आपूर्ति करने का दावा करते हुए आंकड़ा लोगों के सामने ला रहा है.
पर हकीकत में विगत एक सप्ताह से शायद ही शहर के किसी मुहल्ले में 10 घंटे भी नियमित रूप से बिजली मिली हो. किसी क्षेत्र में तीन घंटा तो किसी में चार घंटा तक भी नियमित रूप से बिजली मिल जाये तो गनीमत है. मधुबनी पावर स्टेशन से मिली जानकारी के अनुसार शहर में हर दिन करीब 10 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होती है.
इस आवश्यकता के अनुरूप पावर ग्रिड से 10 मेगावाट बिजली मुहैया करायी जाती है. इसके विरुद्ध विभाग का दावा है कि स्टेशन से चारों फीडर में आठ मेगावाट पावर वितरित किया जा रहा है. हर फीडर में 24 घंटे बिजली दी जा रही है. अब यह स्वत: सोचने वाली बात है कि यदि विभाग का यह दावा सही है तो फिर रास्ते में ही बिजली कहीं खो जाती है?
लोकल फाल्ट के कारण हो रही परेशानी
विद्युत विभाग का कहना है कि लोकल फॉल्ट के कारण लोगों को लो वोल्टेज व ट्रांसफॉर्मर जलने की परेशानी उठानी पड़ रही है. विभाग ने स्पष्ट तौर पर इस परेशानी का ठीक रा जेकेसी प्रोजेक्ट कंपनी पर फोड़ दिया है
क्या कहते हैं अधिकारी
इस बाबत विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार ने बताया है कि लोक ल फॉल्ट के कारण लोगों को बिजली की समस्या हो रही है. इसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है. वहीं जेकेसी के कार्यपालक अभियंता वी चंद्रा ने बताया है कि जल्द ही अनुबंध के अनुसार ट्रांसफॉर्मर व तार को बदल दिया जायेगा.
कभी कम वोल्टेज तो कभी अधिक वोल्टेज से परेशानी
महिला कॉलेज रोड निवासी सुनीता देवी .दिन भर बिजली नहीं मिलने से परेशान थी. रात को भी बिजली नहीं थी. सो गरमी के कारण नींद नहीं आयी. रात भर हाथ पंखा के सहारे गुजारा.
यह हाल शनिवार के दोपहर में भी रहा. कम से कम विभाग के 24 घंटे बिजली आपूर्ति के दावे पर सुनीता ने प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है. इसी प्रकार न्यू चित्रगुप्त कॉलोनी निवासी अमित कुमार झा बताते हैं कि एक तो बिजली नियमित नहीं है. इसके साथ ही कभी कम वोल्टेज तो कभी अधिक वोल्टेज के कारण कई उपकरण जल गया है.
जेकेसी व विभाग में फंसा पेच
लोगों को बिजली नहीं मिल रही है. इसका सबसे बड़ा कारण नार्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी व जेकेसी प्रोजेक्ट के बीच हुए अनुबंध का फंस जाना है. मिली जानकारी के अनुसार पावर कंपनी ने जेकेसी को शहर के 252 किलोमीटर तार व 40 जगहों पर 200 केवीए का ट्रांसफॉर्मर एवं 100 केवीए का अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मर बदलने की जिम्मेदारी देते हुए इसे दिसंबर 2014 में पूरा करने का अनुबंध किया था.
पर इस अनुबंध के समय सीमा समाप्त होने के बाद भी काम की शुरूआत तक जेकेसी नहीं कर सकी. फिर इस अनुबंध का विस्तारीकरण किया गया, जिसके तहत मार्च 15 तक काम को पूरा करना था.
पर यह समय भी काम किये बिना ही समाप्त हो गया. अब नये एक्सटेंशन के तहत 31 मई तक जेकेसी को काम को हर हाल में पूरा करके देना है. यदि इस समय सीमा के अंदर काम पूरा नहीं किया गया तो अनुबंध रद्द कर दिया जायेगा साथ ही राशि भी वसूल की जायेगी.
