मधुबनी : यह तो गनीमत है कि पिछले अठारह दिनों से आ रहे भूकंप के झटकों की तीव्रता रियेक्ट स्केल आठ से नीचे रही है. अगर इसकी तीव्रता आठ तक पहुंच गयी तो खासकर मधुबनी शहर अमूमन ढह जायेगा. यह मानना है भवन निर्माण विभाग या विभाग विभाग के अभियंताओं ने बताया है कि जिस तरह से पिछले 18 दिनों में डेढ़ दर्जन से अधिक बार शहर ने भूकंप का झटका बरदाश्त किया है.
अगर अब कंपन की तीव्रता थोड़ा भी बढ़ी तो शहर ताश के पत्तों की तरह बिखड़ जायेगा. हालांकि अब तक अधिकतक 7.9 रियेक्टर स्केल तक तीव्रता रहीं है. यह तीव्रता बीते 25 अप्रैल को भी जबकी मंगलवार को तीव्रता 7.3 थी. वहीं भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता आर के पंजियार ने बताया है कि अब बनने वाले सभी सरकारी भवनों का नक्शा भूकंप रोधी होता है.
इसका निर्माण भी द्रसी के आधार पर निर्माण कार्य किया जाता है पर शहर या गांव कसबों में बनने वाले मकान में भूकंपरोधी कोई तकनीकी का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. यह खतरनाक है. लोग थोड़े से पैसा बचाने के चक्कर में इससे बचने की जुगत में रहते है यहीं वजह है कि चार की तीव्रता पर कंपन होती है तो लोगों की हलख सूख जाती है. प्राइवेट में लोग भूकंप रोधी नक्शा डिजाइन नहीं कराते है.
कार्यपालक अभियंता ने बताया है कि आमतौर पर ग्रामीण इलाकों में राजमिस्त्री द्वारा बनाये गये डिजाइन पर ही मकान तैयार की जाती है. ऐसे में जरूरी है कि राजमिस्त्रियों को बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण दी जाये, ताकि अधिकतम लोग भूकंप रोधी मकान बनावें. हालांकि श्रम विभाग समय-समय पर राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षण दिलाती है. पर इसमें तेजी लाने की जरूरत है.
वहीं नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी जटाशंकर झा ने बताया है कि शहर में भवन निर्माण के लिये बनने वाले नक्शा में भूकंपरोधी की प्राथमिकता बढ़ी है. विभाग भी दो मंजिल से अधिक के मकान में भूकंपरोधी तकनीकी को आवश्यक मान रही है.
जोन पांच में मधुबनी
मधुबनी को भूकंप के जोन पांच में रखा गया है. इस लिहाज से यह जिला भूकंप के सबसे संवेदनशील इलाका माना जाता है. इसे भूकंप के दौरान व्यापक क्षति वाला क्षेत्र कहा जाता है. जोन पांच में मधुबनी के अलावे सुपौल, सीतामढ़ी, मधेपुरा, अररिया, दरभंगा के आधा भाग तथा सहरसा के उतरी भाग आता है.
