प्रलय का सता रहा भय ईश्वर से कर रहे प्रार्थना

मधुबनी : दोपहर में आये भूकंप के झटके ने पूरे शहर वासी को सड़क पर ला दिया. हर तरफ खौफ का मंजर था. एक के बाद एक करीब चार झटके महसूस किये गये. भूकंप के झटके का डर से लोग घर के अंदर जाना नहीं चाह रहे थे. शहर के हर गली, पार्क, खाली जगहों […]

मधुबनी : दोपहर में आये भूकंप के झटके ने पूरे शहर वासी को सड़क पर ला दिया. हर तरफ खौफ का मंजर था. एक के बाद एक करीब चार झटके महसूस किये गये. भूकंप के झटके का डर से लोग घर के अंदर जाना नहीं चाह रहे थे.
शहर के हर गली, पार्क, खाली जगहों पर लोगों का जमावड़ा देखा गया. छोटे-छाटे बच्चे को गोद में लेकर काफी देर तक लोग सड़क जमे रहे. कई लोग तो दिन भर घर के अंदर नहीं घुसे. विगत 25 अप्रैल को आये भूकंप की अपेक्षा मंगलवार को आये भूकंप के की तीब्रता भले ही कम थी, लेकिन लोगों की दहशत उससे अधिक. लोग भूकंप के आते ही भगवान व अल्लाह को याद कर रहे थे.
हर कोई लगातार आ रहे भूकंप के झटके को भगवान का प्रलय बता रहे थे. हर तरफ सहमी-सहमी जिंदगी सड़क पर घूम रही थी. जब-जब भूकंप के झटके महसूस किये गये, ऑफिस हो घर, दुकान हो दलान सभी अपनी जिंदगी बचाने सुरक्षित खाली जगहों पर भाग रहे थे.
खौफनाक मंजर ने बड़े-छोटे, अमीर-गरीब सभी को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया. जब- जब झटके बंद होते थे, लोग इस उम्मीद के साथ सांस ले रहे थे कि चलो बच गये. भूकंप का पहला झटका 12 बजकर 36 मिनट में आया व दूसरा एक बजकर चार मिनट पर.
इस झटके में सभी को यह भूकंप चक्कर खिलाने में कोई कसर नहीं रखी. लोग जमीन भी पकड़ते देखे गये. कई चक्कर खाकर गिर पड़े. सबसे ज्यादा खौफ बूढ़ों व बच्चों में था. हर तरफ अफरातफरी का आलम देखने को मिल रहा था. हल्की भी भूकंप का भ्रम होता. आवाज आती भूकंप आया भूकंप आया और लोग सेकेंडों में सड़क पर उतर जाते.
यह आलम शहर के प्राय: हर इलाके में देखने को मिला. बीएन झा कॉलोनी में लोग दो बजे दिन तक इधर-उधर भाग रहे थे. कई बुजुर्ग दंपती अपने बच्चों की खोज खबर लेने में जुटे थे.
शंकर चौक पर सैकड़ों की तादाद में लोगों की भीड़ जमा थी. लोग बदहवास दिख रहे थे और एक दूसरे से आगे का हाल जाने की की कोशिश कर रहे थे. दुकानदार अपने दुकानों को जैसे तैसे बंद कर घर भागने में लगे थे.
बाटा चौक पर भी भीड़ भूकंप को लेकर खौफजदा दिखायी पड़े और सब एक दूसरे का हाल जानने को बेताब थे. आम लोगों का चेहरा इस दौरान भय से सना हुआ था. कई महिलाएं अपने नवजात बच्चे को कपड़ा में जैसे तैसे लपेट कर सड़क पर थी.

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