दिन में भूकंप आने के बाद शाम को फिर लोगों में खौफ का आलम
मधुबनी : 25 व 26 अप्रैल के बाद मंगलवार के भूकंप के झटके ने लोगों को दहशतजदा कर दिया है. हालांकि पिछले बार की तरह लोग हमेशा बाहर नहीं रहे लेकिन संशंकित रात को भी दिखे.
हमेशा खौफ का आलम बना हुआ था कि कहीं फिर से झटके ना आ जाय. शहर के विभिन्न मुहल्लों में लोग भूकंप की ही चर्चा कर रहे थे. जिस तरह से आज भूकंप के झटकों ने एक बार फिर दस्तक दी लोगों के दिलो दिमाग में पिछले महीने का मंजर स्पष्ट देखा जा रहा था. लोगों को भय था कि अगर रात में झटका आ जाय तो किधर भागेंगे.
तीन दिनों तक सड़क पर थे लोग
25 व 26 अप्रैल को आये भूकंप ने लोगों को दो तीन दिनों तक सड़क पर रहने को मजबूर कर दिया था. हर तरफ खौफ ही खौफ का मंजर था. कई जगह लोगों ने टेंट खड़ा कर रातें काटी थी. बाजारों में सन्नाटा पसर गया था. लोगों ने खौफ में जिंदगी बितायी थी. मंगलवार को भी जिले वासी पिछले महीने के भूकंप के खौफ से उबरे भी नहीं थे, एक बार फिर प्रकृति ने लोगों को खौफजदा कर दिया.
शाम होते ही किया घर का रुख
मंगलवार को भूकंप के बाद हर तरफ लोग जल्दी-जल्दी अपने अपने घर का रूख करना चाह रहे थे.जो शहर के बाहर से काम-काज के लिये आये थे. सबेरे ही घर वापस जाने में भलाई समझ रहे थे. लाल निकुंज निवासी विनोद कुमार झा बताते हैं कि इस बार के भूकंप में घर में बैठे तो हैं लेकिन मन सशंकित है कि कहीं भूकंप फिर से न आ जाये. चार-पांच झटकों ने डर पैदा कर दिया है. अजीत चौधरी बताते हैं कि रात में घर के बरामदे पर बैठा हूं, चिंता है कि रात में सोये रहते भूकंप न आ जाये.
वहीं, डॉ एसके ठाकुर बताते हैं कि अभी हाल ही में खौफ से उबरे थे, एक बार फिर भूकंप ने खौफ में डाल दिया है. सबसे ज्यादा परेशानी बूढ़ों व बच्चों को लेकर घरों में दिख रही थी.
जिस तरह झटकों ने बार-बार लोगों को घरों से बाहर मंगलवार को जाने को मजबूर कर दिया. बूढ़ों को घर से झट से बाहर निकालना रात के समय में मुश्किल का सबब बन गया. कई घरों में शाम के समय में ही बरामदे पर रात को सोने की व्यवस्था की जा रही थी.
