लगातार तीन दिन आये भूकंप के बाद नप प्रशासन ने शुरू किया मंथन
नगर परिषद प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. लगातार भूकंप के झटके के बाद इसके स्थायी व मजबूती को लेकर नप प्रशासन पूरी तरह आश्वस्त होना चाहती है, ताकि यह शहर वासियों के लिए आपदा के समय खतरे का कारण न बन सके. इसी को लेकर मोबाइल टावर के लिए शहरी क्षेत्र में तय मानक की समीक्षा की कवायद शुरू कर दी गयी है.
मधुबनी : शहर में लगे विभिन्न मोबाइल कंपनियों के लगे टावर की नगर परिषद (नप) प्रशासन समीक्षा करेगी. भूकंप के दौरान यह कितने सुरक्षित हैं इसकी जांच भी की जायेगी. लगातार तीन दिन आये भूकंप के झटकों के बाद नप प्रशासन ने इसको लेकर गंभीर मंथन शुरू कर दिया है.
यह भी देखा जायेगा कि जिन मकानों पर मोबाइल टावर लगे हैं वे कितना सुरक्षित हैं. वहीं, किसके आदेश पर मोबाइल टावर लगाया गया है, इसकी भी पड़ताल की जायेगी. गौरतलब है कि सरकार ने 2012 में एक अधिनियम बना कर निकाय क्षेत्रों में जानमाल की सुरक्षा को देखते हुए टावर लगाने से पहले मोबाइल कंपनियों को इसके लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया है.
शहर में हैं 16 मोबाइल टावर
शहर में विभिन्न कंपनियों के 16 मोबाइल टावर लगे हुए हैं. विभागीय आंकड़ों के मुताबिक और जितने भी टावर लगे हैं. वह अवैध रूप से लगे हुए हैं. शहर में एयरटेल के सात, बीएसएनएल के चार व रिलायंस के पांच मोबाइल टावर ही पंजीकृत हैं.
नप को मिलता है सालाना राजस्व
मोबाइल टावर कंपनियों को शहर में टावर लगाने के लिए रजिस्ट्रेशन के लिए 40 हजार शुल्क जमा करना पड़ता है. तत्पश्चात सालाना नवीकरण के लिए 10 हजार रुपये जमा करना पड़ता है. नवीकरण शुल्क में सालाना डेढ़ लाख रुपये राजस्व प्राप्त होते हैं.
क्या कहते हैं कार्यपालक पदाधिकारी
नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी जटाशंकर झा ने कहा कि भूकंप के बाद मोबाइल टावरों की समीक्षा की योजना है. क्षतिग्रस्त मोबाइल टावरों को हटाया जायेगा. वहीं, बिना पंजीकृत मोबाइल टावर कंपनियों को नोटिस जारी किया जायेगा. लोगों की सुरक्षा का नगर परिषद प्रशासन हमेशा ख्याल रखता आया है. यह इसी दिशा में उठाया गया कदम हैं.
