मधुबनी : आबादी बढ़ी, आवासीय परिसरों की संख्या में बेतहाशा इजाफा हुआ. बदलते आर्थिक परिवेश में शहर में हजारों नयी दुकाने खुली, लेकिन शहर का क्षेत्रफल वही रहा जो आजादी के बाद था.
बदकिस्मती रही कि नगर परिषद तक ही सिमट गया. नगर निगम बनने का सपना अधूरा रह गया. मुख्य शहर में दुकान व अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान खोलने की मची होड़ में इस बात को भुला दिया गया कि आपातकालीन स्थिति में क्या होगा. बैंक की शाखाओं की बढ़ती संख्या एवं उपभोक्ताओं की संख्या में बढ़ोतरी ने आपदा सुरक्षा के समक्ष नयी चुनौती पेश की. शहर में हाल इतनी बदतर हो गयी है कि आपदा की स्थिति में लोगों सुरक्षित बाहर निकालना मुश्किल होगा.
कहां-कहां है परेशानी
शहर के सघन आबादी वाले चूड़ी बाजार रोड में बैंक की विभिन्न शाखाओं के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक सामान सहित अन्य सैकड़ों दुकान है, लेकिन सड़क इतनी संकीर्ण है कि आपदा के समय यहां टाइम पर एंबुलेंस का पहुंचना भी मुश्किल होगा. पूर्व जिलाधिकारी राहुल सिंह ने इस सड़क किनारे से अतिक्रमण हटाने का मास्टर प्लान तैयार किया.
पर चर्चा है कि कुछ राजनीतिक आकाओं क दबाव पर मामला को दबा दिया गया. हाल इतनी गंभीर हो गई है कि थाना चौक से बाटा चौक, बाटा चौक से चुड़ी बाजार होते हुए शंकर चौक तक जाने वाली सड़क आपदा के समय लोगों को कोई राहत नहीं पहुंचा सकती. कई डीएम आये और गये पर थाना चौक से शंकर चौक जाने वाली सड़क का चौड़ीकरण नहीं हो सका.
कई अन्य जगह मुश्किलें
आपदा के समय शंकर चौक, स्टेशन चौक पर राहत दिलाना कठिन है. सड़क किनारे बढ़ती दुकानों की संख्या व भीड़ से होने वाली असुरक्षा से जिला प्रशासन बेखबर नजर आ रही है. एक अनुमान है कि शहर में वर्ष 2014 और 2015 में जितने मकान व बने है उतना आजादी के 60 साल में भी नहीं बन सका.सड़क किनारे इन दुकानों का साइन बोर्ड लगा दिये जाने से आये दिन दुर्घटनाएं हो रही है.
कहां कहां है मुसीबत
वार्ड 2, 3, 4, 5, 13, 14, 15, 16, 17, 18, 24, 25, 28 की मुख्य सड़कों को किनारे दुकान लगाये जाने के कारण आफत आ गई है. लोहापट्टी को अतिक्रमण से मुक्त कराना कठिन साबित हो रहा है. अगर थाना चौक, बाटा चौक, चुड़ी बाजार, महंथी लाल चौक से शंकर चौक, जाने वाली सड़क को चौड़ा नहीं किया गया तो कभी भी अनहोनी हो सकती है.
