विभाग को बांस के खंभे का सहारा

उदासीनता : समय सीमा खत्म, फिर भी नहीं बदले गये शहर में बिजली के जजर्र तार व पोल बिजली विभाग बिजली व्यवस्था में लाख दावे करें, लेकिन हकीकत इससे परे है. गांवों की बात तो दूर शहर मुख्यालय के भी कई वार्डो में आज भी पोल नहीं गाड़े जा सके हैं. इस कारण उपभोक्ता वर्षो […]

उदासीनता : समय सीमा खत्म, फिर भी नहीं बदले गये शहर में बिजली के जजर्र तार व पोल
बिजली विभाग बिजली व्यवस्था में लाख दावे करें, लेकिन हकीकत इससे परे है. गांवों की बात तो दूर शहर मुख्यालय के भी कई वार्डो में आज भी पोल नहीं गाड़े जा सके हैं.
इस कारण उपभोक्ता वर्षो पुरानी परंपरा बांस बल्ला के सहारे अपने घरों तक बिजली तार ले रहे है. विभाग सब कुछ जानते हुए भी अंजान बना हुआ है. मंगलवार की देर शाम आयी आंधी व बारिश ने शहर मुख्यालय के ऐसे कई बांस बल्ले को तोड़ कर गिया दिया. जिस के सहारे बिजली की आपूर्ति हो रही थी. बांस बल्ला टूटने के कारण कई इलाकों में बिजली सेवा बाधित है.
मधुबनी : शहरी क्षेत्र में अब भी बांस बल्ले की सहारे बिजली की आपूर्ति की जा रही है. जगह-जगह बास बल्ले पर बिजली के तार जाल की शक्ल में नजर आ रहे हैं. दरअसल, अब तक शहर मुख्यालय में बिजली के जजर्र तार व पोल को नहीं बदला जा सका है. इस कारण लोगों को न सिर्फ बिजली आपूर्ति में परेशानी होती है बल्कि इससे दुर्घटना की संभावना भी बढ़ गयी है.
मंगलवार की रात आयी तेज आंधी व बारिश के दौरान कई जगहों पर बांस बल्ले टूट कर गिर गये हैं. इससे लोगों के घरों में बिजली की आपूर्ति बाधित हो गयी है. आज भी भौआरा, मंगरौनी, तेलिया चौरी, धोबिया टोली, हनुमान बाग कॉलोनी सहित अन्य कॉलोनी में बांस बल्ले के सहारे ही बिजली की आपूर्ति की जा रही है.
30 वार्डो में होना था काम
समय से बिजली के जजर्र तार व पोल बदलने में शिथिलता बरतने के मामले को बिजली विभाग ने गंभीरता से लिया हैं. विभाग के अधीक्षण अभियंता वीरेंद्र प्रसाद ने इस मामले को लेकर जीकेसी कंपनी से स्पष्टीकरण पूछा है. शहर के सभी 30 वार्डो में बिजली के जजर्र तार बदले जाने थे.
इसके लिए विभाग ने जीकेसी कंपनी को काम सौंपा था. विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जीकेसी कंपनी को शहर के सभी वार्डो में करीब 51 किलोमीटर की लंबाइ में तार को बदलना था. इसके विरुद्ध मात्र 11 किलोमीटर लंबाइ में ही तार को बदला जा सकता है. दरअसल वर्षों पुराने तार के जजर्र होने से शहर में दुर्घटना की आशंका हमेशा बनी रहती है. इसे देखते हुए विभाग ने नंगे तार की जगह बंच केबल लगाने का प्रस्ताव पारित किया था.
पूरा नहीं हो सका कार्य
बंच केबल बदलने की समय सीमा समाप्त हो गयी है. विभाग के अनुसार जीकेसी कंपनी का नार्थ बिहार पावर कंपनी के साथ एकरार किया गया था. इसके तहत जीकेसी को 31 मार्च तक सभी जजर्र नंगे तार को बदल कर बंच केबल लग जाना चाहिए था, लेकिन अब तक यह कार्य पूरा नहीं हो सका है.

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