प्रभात परिचर्चा. प्रभात खबर की ओर से आयोजित कार्यक्रम में किसानों ने सुनायी अपनी पीड़ा
मधुबनी : बेमौसम बारिश एवं ओलावृष्टि ने किसानो पर कहर बरपाया है. किसानों की रबी फसल को भारी क्षती पहुंची है. करीब एक लाख किसानों के फसल बर्बाद हो गये हैं हालांकि यह आंकड़ा इससे कही अधिक है. विभाग की मानें तो जिले के करीब 60 हजार हेक्टेयर में लगा रबी की फसल प्रभावित हुई है.
विगत तीन सालों से सूखाड़ से जुझ रहे किसानों के उपर बेमौसम बारिश ने बज्रपात कर दिया है. बारिश की एक एक बूंद मानों किसानों के शरीर से खून निचोड़ लिया है.
बैंक तथा महाजनों से कर्ज लेकर गेहूं की खेती करने वाले किसानों को ऋण अदा करने की चिंता सताने लगी है. किसानों के मेहनत, पूंजी के साथ साथ किसानों का सपना भी समाप्त हो गया है. विभाग किसानों के फसल की क्षति का आंकलन कर रहा है.
पर किसानों को सहज यह विश्वास नहीं हो रहा है कि उनके फसल क्षति का मुआवजा मिल सकेगा.
दरअसल विगत 12-13 में जिला मे पूर्ण सुखाड़ था. इसको लेकर सहायता अनुदान देने की मांग जिला से की गयी पर आज तक क्षेत्र के किसानों को इसके लिये एक सिक्के का सहायता नहीं मिल सका. इससे किसानों में आशंका है कि फसल क्षति का मुआवजा भी मिलेगा या नहीं. या फिर मिलेगा तो वह बिना घूस दिये उनके हाथ तक आ सकेगा या नहीं. इस साल रबी फसल में 96 हजार हेक्टेयर खेत में गेहूं की खेती की गयी थी.
विगत दिनों हुई आंधी बारिश में 52 फीसदी फसल बर्बाद हो गया है. किसी ने बैक से ऋण लेकर खेती किया था तो किसी ने साहुकार से सूद पर रूपये उठाये थे. अब किसानों के किसानो को अपने ऋण को चुकता करना भी असंभव हो गया है.
प्रभात खबर के द्वारा किसानों की इस समस्या को लेकर विभिन्न क्षेत्रों में परिचर्चा का आयोजन किया गया. जिसमें किसानों ने अपनी समस्या सामने रखी.
मूंग की खेती करें किसान : रंधीर
जिला कृषि परामर्शी रंधीर भारद्वाज एवं एस ए रब्बानी ने वर्तमान स्थिति में किसानों से कई प्रकार की खेती करने की सुझाव दी है. कहा है कि खतों में नमी है ऐसे में गरमा सब्जी की खेती किसानों के लिये सबसे बेहतर साबित हो सकता है.
किसान जल्द से जल्द उन्नत किस्म के सब्जी बीज खेतों में लगायें. इसके साथ ही मूंग की खेती भी किसानों के घाटे से उबारने के लिये उपयुक्त है.
सब्जी, गरमा धान की खेती की करें तैयारी: राम राजी सिंह
किसान भूूषण रामराजी सिंह ने कहा है कि फसल क्षति हो चुकी है. सरकार इसके लिये सहायता उपलब्ध करा सकती है. पर किसानों को खुद ही अपनी क्षति को कम करने के लिये आगे आना होगा. इसका एक मात्र विकल्प है कि किसान हौसला के साथ खेती करें. श्री सिंह ने किसानों से वर्तमान परिवेश में सब्जी व गरमा धान की खेती क ो बेहतर बताया है. कहा है कि खेतों में पूरी नमी है. किसान इस नमी में मूंग, सब्जी के साथ साथ गरमा धान की खेती कर सकते हैं.
किसान हुए प्रभावित
फसल की क्षति जिले के किसी एक भाग में ही नहीं हुई है. बल्कि जिले के सभी भागों में किसानों के उपर बारिश व आंधी ने कहर बरपाया है. इस विपदा से फुलपरास अनुमंडल के किसान भी नहीं बचे हैं. इस क्षेत्र के किसानों के भी सपने चूर चूर हुए हैं. क्षेत्र के किसानों के सामने अब यह परेशानी है कि वे अपने खेत में कौन सा वैकल्पिक फसल लगाये जिससे कि इस नुकसान की कुछ भरपाई हो या फिर सरकार कुछ ऐसा इंतजाम करे कि किसानों को समय से सहायता मिल सके.
उम्मीद थी कि उपज होगी तो साहुकार का ऋण चुकता कर देंगे और इससे अपने परिवार का भरण पोषण भी करेंगे. पर आज सब कुछ समाप्त हो गया है.
