मधुबनी : फरवरी के प्रथम सप्ताह में ही विद्यालय से बाहर के बच्चों की सूची उपलब्ध कराने का बिहार शिक्षा परियोजना ने निर्देश दिया था. सात फरवरी तक आउट ऑफ स्कूल सभी बच्चे-बच्चियों की सूची हार्ड एवं सॉफ्ट कॉपी में उपलब्ध कराना था, लेकिन अभी तक यह सूची उपलब्ध नहीं करायी जा सकी है.
विद्यालय से बाहर के छह से 14 आयु वर्ग के बच्चों के आंकड़ों के आधार पर ही वित्तीय वर्ष 2015-16 का वार्षिक कार्य योजना व बजट का निर्माण हो सकेगा. 10 फरवरी के बजट अप्रेजल में इसे शामिल नहीं किया जा सका है. डीपीओ सर्वशिक्षा अभियान ने काफी खेद व्यक्त करते हुए कहा है कि यह कार्य के प्रति लापरवाही का परिचायक है. बाल पंजी से विद्यालय से बाहर के बच्चों का आंकड़ा प्राप्त किया जायेगा.
क्या है आउट ऑफ स्कूल
वैसे छह से 14 आयु के बच्चे जो होटलों में प्लेट धोने का काम करते हैं या अन्य बाल मजदूरी करते हैं या फिर गली-गली में घूमकर प्लास्टिक, लोहा, टीना, कचड़ा में तलाश करते हैं. वैसे बच्चे-बच्चियां जो छह से 14 आयु वर्ग के हैं उनकी पहचान करनी है और उनका नाम पता बाल पंजी में लिखना है. जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में काफी संख्या में ऐसे बच्चे-बच्ची हैं जो चाय की दुकान, होटल आदि जगहों में काम करते हैं. कई बच्चे-बच्चियों के घरेलू नौकर के रूप में काम करने की आशंका बनी हुई है. सबसे अधिक वैसे बच्चे-बच्ची हैं जिनके रोजगार का सहारा कूड़ा-कचरा से प्लास्टिक, लोहा का टुकड़ा आदि चुनना है. ऐसे बच्चों की भी पहचान करनी है.
क्या कहते हैं अधिकारी
डीपीओ सर्वशिक्षा अभियान हरि नारायण झा ने बताया कि सभी प्रखंड शिक्षा अधिकारियों (बीइओ) को 36 घंटों के अंदर छह से 14 साल के वैसे बच्चे-बच्चियों की पहचान कर सूची विहित प्रपत्र में भेजने का निर्देश दिया गया है जो विद्यालय से बाहर हैं. डीपीओ ने बताया कि जिले के सभी स्कूलों में बाल पंजी सर्वेक्षण का कार्य 31 जनवरी 2015 तक पूर्ण करने का निर्देश दिया गया था. सूची में विलंब के लिए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीइओ) जिम्मेदार होंगे. शिक्षा का अधिकार बच्चों का मौलिक अधिकार है. सभी का दायित्व है कि शिक्षा के अधिकार कानून का पालन करें.
