जयनगर : विद्युत अवर प्रमंडल जयनगर क्षेत्र के विद्युत उपभोक्ताओं को विभाग दिये जा रहे विद्युत विपत्र में गड़बड़ी रहने के कारण काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. उपभोक्ताओं का कहना है कि जब से इलेक्ट्रॉनिक्स डिजिटल मीटर लगाया गया है. तब से उपभोक्ताओं की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं. यही नहीं, गलत रीडिंग के आधार पर विद्युत विपत्र आने से उपभोक्ता विपत्र सुधार के लिए कार्यालय का चक्कर लगाने को मजबूर हैं.
विभागीय लापरवाही का नमूना
केस एक : विभागीय लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर के वार्ड नंबर दो के रिषभ केजरीवाल को एक महीने का ऑन द स्पॉट बिल एक लाख का मिला. उनके द्वारा तुरंत इसकी शिकायत विभाग से की गयी. तब जाकर उनका बिल तकरीबन 350 रुपये का आया.
केस दो : नपं के अजय कुमार गुप्ता के घर डीएस नंबर 3972 में आठ महीने का बिल 51 हजार रुपये का आया है. श्री गुप्ता ने चार महीनों से मीटर के गड़बड़ होने तथा इसे सुधारने के लिए आवेदन सहायक अभियंता को दे रखा है, लेकिन विभाग उदासीन है. इनका बिजली का कनेक्शन महिनों पहले काट दिया गया था, लेकिन उन्हें हर माह विपत्र प्राप्त हो रहा है.
केस तीन : इसी प्रकार शहरी क्षेत्र के सुखदेव महतो के घर का एक महीना का बिल करीब 45 हजार रुपये आया. श्री महतो ने कई बार विपत्र सुधार के लिए सहायक अभियंता व कनीय अभियंता को आवेदन दिया पर समस्या जश की तश बनी हुई है.
केस चार : स्टेशन रोड के दशरथ प्रसाद ने बताया कि पिछले साल से मनमाना बिजली विपत्र आ रहा है. हर माह 30 हजार रुपये से अधिक का बिल आने से वह परेशान हैं. आवेदन के बाद भी सुधार नहीं हो रहा है.
इसी तरह का आलम कमावेश शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं का है. इस कारण विद्युत उपभोक्ताओं में विभाग व फ्रेंचायजी के विरुद्ध आक्रोश बढ़ता जा रहा है. जयनगर शहरी फ्रेंचाइजी के सुमन झा ने बताया पूर्व में जितने भी बिलों में गड़बड़ी की शिकायत हुई है, वह विभागीय जिम्मेदारी है. पिछले एक महीने से ऑन द स्पॉट बिल में पारदर्शिता बरती जा रही है.
क्या कहते हैं अधिकारी
कनीय अभियंता मो शकील ने बताया कि बिलों की सुधार के लिए पहल की जा रही है.
