मधुबनी.
भैरवस्थान थाना क्षेत्र में करीब 28 वर्ष पूर्व चर्चित योगेंद्र हत्या मामले में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनामिका टी के न्यायालय में शुक्रवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई. न्यायालय ने दोनों पक्ष की बहस सुनने के बाद आरोपी भैरवस्थान थाना क्षेत्र के झौआ निवासी कमल यादव व अन्य 13 आरोपितों कुशे यादव, जामुन यादव, प्रमोद यादव, चंदर यादव, महेश यादव, रघुनी यादव, बौअन यादव, विदेश्वर यादव, कारी यादव, ललित यादव, उत्तीम यादव, सुरेश यादव एवं सूरत यादव को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनायी. साथ ही प्रत्येक पर 10- 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है. जुर्माने की राशि नहीं देने पर छह माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. साथ ही अन्य दफा में प्रत्येक को दो वर्ष कारावास व एक हजार रुपये जुर्माना, चंदर यादव एवं विन्देश्वर यादव को 5 वर्ष कारावास व तीन- तीन हजार रुपये जुर्माना लगाया है. सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी. सरकार की ओर से लोक अभियोजक मनोज तिवारी एवं अपर लोक अभियोजक अजित कुमार सिन्हा ने बहस करते हुए कड़ी से कड़ी सजा की मांग की थी. बचाव पक्ष से वरीय अधिवक्ता दीनानाथ यादव व सूर्य नारायण मिश्रा ने कम से कम सजा की मांग की थी.जमीन विवाद में लाठी-डंडे से पीट कर मारा डाला था योगेंद्र यादव को
चर्चित योगेंद्र हत्या मामले में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनामिका टी के न्यायालय में शुक्रवार को भैरवस्थान थाना क्षेत्र के झौआ निवासी कमल यादव व अन्य 13 आरोपितों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनायी. साथ ही प्रत्येक पर 10- 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है.घटना 5 अक्तूबर 1997 की है. पहले से विवाद को लेकर आरोपी पहले से बाहरी लोगों को अपने दरवाजा पर बैठा कर रखे थे. इसके बाद सूचक नागेश्वर यादव को संवाद भिजवाया कि विवादित जमीन का पंचायत कर निबटारा करा लें. संवादकर्ता बिरबल यादव व भोस यादव सूचक से संवाद कर ही रहे थे कि इसी दौरान सभी आरोपित लाठी, फरसा व हरबे हथियार से लैस गाली देते हुए सूचक के दरवाजे पर पहुंच कर घर के छप्पर का खर (घास) नोंचने लगा. घर में घुस कर गेहूं का बोरा ले जाने लगा व छींटने लगे. सूचक की बहन मना करने लगी, तो गड़सा से उसके सिर पर हमला कर दिया. वह जख्मी हो गयी. इसी दौरान सूचक का भतीजा योगेन्द्र यादव बचाने आया, तो सभी ने फरसा व भाला से मारा. इससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया.
इलाज के लिए ले जाने के दौरान फिर घेरा
जख्मी योगेंद्र यादव को खाट पर लाद कर इलाज के लिए उसके परिजन व ग्रामीण ले जा रहे थे. जब एक आरोपी के घर के सामने पहुंचा, तो उसी समय उसके दरवाजे पर बैठे आरोपितों ने फिर घेर कर लाठी डंडा से इतना मारा था कि योगेंद्र यादव की मौके पर ही मौत हो गयी. सूचक नागेश्वर यादव के बयान पर भैरवस्थान थाना में प्राथमिकी दर्ज हुई थी.
अभियोजन की ओर से स्पेशल अधिवक्ता थे नियुक्त
सूचक इतना गंभीर था कि मामले में विचारण के दौरान फैसला के लिए न्यायालय में हमेशा उपस्थित रहता था. सुनवाई के लिए सरकार से वरीय अधिवक्ता कमल नारायण यादव को स्पेशल अभियोजन पक्ष की ओर से बहस के लिए आदेश ले रखा था. कई बार मामला निर्णय पर आने के बाद तकनीकी कारणों से तारीख बढ़ जाती थी. इसी दौरान सूचक नागेश्वर यादव का 10 जून 2024 में निधन हो गया. इसके बाद मामले को उसके पुत्र पवन कुमार यादव ने आगे बढ़ाया. कई इजलास के बाद अभिलेख प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनामिका टी के न्यायालय में पहुंचा. अभिलेख निर्णय पर पहुंचा था कि मामले में सूचक की ओर से स्पेशल नियुक्त अधिवक्ता कमल नारायण यादव का 4 अक्टूबर 24 को निधन हो गया. फिर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनामिका टी के न्यायालय से 28 साल बाद सजा पर फैसला आया.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
