टीकाकरण व परिवार नियोजन में जिले की उपलब्धि औसत से नीचे

मधुबनी : वर्ष 2018-19 में जिला में टिकाकरण व परिवार नियोजन कार्यक्रम में जिला की उपलब्धि राज्य के औसत से कम रहा. जबकि इन कार्यक्रमों में विभाग द्वारा लाखों रुपये खर्च किया गया. सबसे बुरा हाल सिजेरियन सक्सेस ऑपरेशन का रहा. जहां राज्य के 17 फीसदी उपलब्धि के विरुद्ध जिला 0.29 फीसदी ही पूरा कर […]

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मधुबनी : वर्ष 2018-19 में जिला में टिकाकरण व परिवार नियोजन कार्यक्रम में जिला की उपलब्धि राज्य के औसत से कम रहा. जबकि इन कार्यक्रमों में विभाग द्वारा लाखों रुपये खर्च किया गया. सबसे बुरा हाल सिजेरियन सक्सेस ऑपरेशन का रहा. जहां राज्य के 17 फीसदी उपलब्धि के विरुद्ध जिला 0.29 फीसदी ही पूरा कर सका. सिजेरियन सेक्सन ऑपरेशन की बात की जाय तो जिला राज्य के नीचले औसत के 5 जिला में शामिल हैं. जहां राज्य का औसत प्रतिशत 17 प्रतिशत के विरूद्ध जिला का औसत प्रतिशत .29 प्रतिशत है. हालांकि प्रसव काल में टीकाकरण में जिला की उपलब्धि 116 फीसदी रहा.

टीटी बुस्टर का हाल भी ठीक नहीं
टीटी बुस्टर का टीका जो गर्भवती महिलाओं को गर्भधारण के तीसरे वर्ष के अंदर दिया जाता है कि उपलब्धि राज्य का औसत 559 प्रतिशत के विरुद्ध जिला की उपलब्धि मात्र 53 प्रतिशत ही रहा. उल्लेखनीय है कि जिला में संस्थागत प्रसव 42 प्रतिशत रहा. जबकि राजय का औसत प्रतिशत 47 प्रतिशत है. . विशेषज्ञ बताते हैं कि 5 प्रतिशत प्रसव के मामलों में सिजेरियन ऑपरेशन किया जाना आवश्यक होता है. जबकि आंकड़ों पर गौर करें तो यह आंकड़ा स्वयं सिजेरियन की स्थिति को दर्शता है.
परिवार नियोजन का हाल खराब. परिवार नियोजन के संसाधन को उपलब्ध कराने में भी जिला का औसत काफी नीचे रहा. इस योजना के तहत इंटरवल आइयूसीडी में 9 हजार 100 के विरुद्ध जिला की उपलब्धि शून्य रहा.
मेंटोक्रोमेन नामक गर्भनिरोधक गोली जो छाया के नाम से प्रचलित है. ऐसी महिला जो गर्भधारण नहीं करना चाहिए है उसे सप्ताह में एक गोली खानी पड़ती है. राज्य द्वारा निर्धारित लक्ष्य 18 हजार 199 के विरुद्ध महज 3 हजार 838 महिलाओं को ही दिया गया. जो राज्य के औसत 44 प्रतिशत के 21 प्रतिशत ही है.
यही हाल पुरुषों के कंडोम वितरण में भी रहा. जिला में 9 लाख 9 हजार 965 पुरुष जो प्रजनन आयु के है. जिन्हें कंडोम वितरित किया जाना था. जिले में मात्र 38 प्रतिशत पुरुषों में ही वितरित किया गया. जो राज्य औसत 42 प्रतिशत से कम है. अंतरा गर्भ निरोधक सूई जिसकी एक सूई लेने पर तीन माह तक गर्भ धारण को रोका जा सकता है.
राज्य के निर्धारित लक्ष्य 18 हजार 199 के विरुद्ध महज 7 हजार 320 महिलाओं को ही दिया गया, जो राज्य के औसत 58 प्रतिशत से कम रहा. प्रसव के सात दिनों के अंदर बंध्याकरण का निर्धारित लक्ष्य 40 हजार 157 के विरुद्ध मात्र 929 महिलाओं का ही बंध्याकरण किया गया. महिला बंध्याकरण का निर्धारित लक्ष्य 22 हजार 749 के विरुद्ध 9 हजार 357 महिलाओं का ही बंध्याकरण किया जो राज्य के औसत 52 प्रतिशत के विरुद्ध 41 प्रतिशत ही रहा.
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