मधुबनी : वर्ष 1990-95 के दौर में तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ इरकुश टोप्पो द्वारा स्वास्थ्य विभाग में तृतीय व चतुर्थ वर्ग के 47 कर्मी की नियुक्ति मामले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. लोकायुक्त की सुनवाई में 47 कर्मियों में से 24 कर्मियों की नियुक्ति जांच के बाद अवैध पायी गयी है. जबकि 6 कर्मियों की नियुक्ति में अनियमितता पायी गयी है.
24 साल पहले हुई अवैध नियुक्ति 24 कर्मी अब तक उठा रहे वेतन
मधुबनी : वर्ष 1990-95 के दौर में तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ इरकुश टोप्पो द्वारा स्वास्थ्य विभाग में तृतीय व चतुर्थ वर्ग के 47 कर्मी की नियुक्ति मामले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. लोकायुक्त की सुनवाई में 47 कर्मियों में से 24 कर्मियों की नियुक्ति जांच के बाद अवैध पायी गयी है. जबकि 6 […]

जबकि मात्र 17 कर्मियों की नियुक्ति को वैध ठहराया गया है. इस मामले की जांच कई चरणों में होने के बाद भी अबुझ पहेली बनी हुई थी. लेकिन 18 अप्रैल को निदेशक प्रमुख रोग नियंत्रण डा. आरडी रंजन के द्वारा किये गये जांच के बाद लोकायुक्त के यहां हुई सुनवाई में बड़ा खुलासा हुआ है. सभी अवैध व अनियमित नियुक्त कर्मियों को 3 जून से पूर्व अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश निदेशक प्रमुख द्वारा दिया गया है.जिससे की मामले में अंतिम फैसला लिया जा सके.
क्या है मामला. वर्ष 1990-95 में तत्कालीन सीएस डा. इरकुश टोप्पो द्वारा 47 कर्मियों की नियुक्ति की गयी थी. जिसमें 11 एएनएम, 11 चालक, 5 परिवार कल्याण कार्यकर्ता, 1 लिपिक, 15 चतुर्थवर्गीय कर्मी व चार बुनियादी कार्यकर्ता शामिल थे. वर्ष 1994 में स्वास्थ्य विभाग के कर्मी द्वारा नियुक्ति के विरुद्ध लोकायुक्त के यहां परिवाद दायर किया गया था.
इस मामले की जांच कई चरणों में जिला से लेकर राज्य स्तर के पदाधिकारी द्वारा की गयी. लेकिन मामले में हर जांच में लीपापोती की गई. जांच दल द्वारा लोकायुक्त को दिये गये प्रतिवेदन के आधार पर सुनवाई चलती रही. जिसके बाद 18 अप्रैल 2019 को मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग के निदेशक प्रमुख डा. आरडी रंजन द्वारा सीएस कार्यालय पहुंचकर सभी कर्मियों का भौतिक व कागजातों की जांच गहनता से की गयी. जांच के बाद जांच पदाधिकारी द्वारा लोकायुक्त के यहां जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया.
रकम की होगी वसूली
निदेशक ने बताया कि इस मामले में तीनों कर्मियों से उक्त अवधि का प्राप्त भुगतान की वसूली की जायेगी. जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 1993 में कामेश्वर मंडल द्वारा सीडब्लू जेसी 25/93 के तहत याचिका दायर किया गया था. इसमें मंडल के पक्ष में फैसला दिया गया था.
तीनों बुनियादी स्वास्थ्य कार्यकर्ता को इसी फैसले के आधार पर नो वर्क नो पेमेंट के बाद भी भुगतान किया गया. डा. रंजन ने बताया कि सभी अवैध कर्मियों से स्पष्टीकरण पूछा जा रहा है. 3 जून 19 को इस मामले की पून: सुनवाई होगी. कर्मियों द्वारा 3 जून से पूर्व सभी कागजातोंसहित स्पष्टीकरण यदि उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो इन कर्मियों के विरुद्ध अग्रेतर कारवाई की जायेगी.