AICTE VAANI 2026 : यूवीके कॉलेज में आयोजित होने वाला दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार 'नदी परंपरा से लेकर एक्वा-टेक तक : नील अर्थव्यवस्था में टिकाऊ मत्स्य पालन और मखाना खेती के लिए इंटरनेट ऑफ थिंग्स एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग' विषय पर केंद्रित होगा. इसका उद्देश्य क्षेत्रीय भाषा के माध्यम से आधुनिक तकनीकी ज्ञान को किसानों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों तक पहुंचाना है.
बिहार के सिर्फ दो संस्थानों में शामिल हुआ कॉलेज
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की 'वाणी' योजना के तहत देशभर से आए हजारों प्रस्तावों में यूवीके कॉलेज का चयन बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. मधेपुरा जिले का यह एकमात्र संस्थान है जिसे यह सम्मान मिला है. वहीं पूरे बिहार में केवल दो संस्थानों का चयन इस योजना के लिए किया गया है.
मखाना और मत्स्य पालन में आधुनिक तकनीक पर होगा मंथन
मैथिली विभाग के सहयोग से संगणक अनुप्रयोग विभाग इस सेमिनार का आयोजन करेगा. इसमें मिथिलांचल और कोसी क्षेत्र की पारंपरिक मखाना खेती एवं मत्स्य पालन को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी आधुनिक तकनीकों से जोड़ने पर विस्तृत चर्चा होगी. शिक्षा और उद्योग जगत के 10 विशेषज्ञ विभिन्न तकनीकी सत्रों में अपने अनुभव साझा करेंगे.
संस्थापक प्राचार्य की विरासत को आगे बढ़ा रहा कॉलेज
कॉलेज की इस उपलब्धि को संस्थापक प्राचार्य स्वर्गीय डॉ. माधवेन्द्र झा की दूरदर्शी सोच का परिणाम माना जा रहा है. उनके नेतृत्व में यूवीके कॉलेज बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय का पहला राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद से मान्यता प्राप्त महाविद्यालय बना था. वर्तमान में संयोजक डॉ. अमरेन्द्र कुमार झा, समन्वयक प्रो. डॉ. ललन कुमार झा और सह-समन्वयक डॉ. मो. मुदस्सिर सिद्दीकी के नेतृत्व में संस्थान उनकी शैक्षणिक विरासत को आगे बढ़ा रहा है.
पंजीकरण शुरू, तैयारियों में जुटा कॉलेज
कॉलेज के सूचना प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ. ई. सिप्पू कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय सेमिनार की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल कॉलेज बल्कि पूरे विश्वविद्यालय और कोसी क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है. मैथिली भाषा में तकनीकी शिक्षा के नए युग की शुरुआत माने जा रहे इस सेमिनार के लिए पंजीकरण प्रारंभ हो चुका है.
