हरिहर साहा कॉलेज में उर्दू सेमिनार सह सांस्कृतिक कार्यक्रम, छात्र-छात्राओं ने प्रस्तुत की प्रतिभा

हरिहर साहा महाविद्यालय में उर्दू विभाग द्वारा आयोजित सेमिनार में छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया. सर सैयद अहमद खान और अल्लामा इकबाल के साहित्य और विचारों पर प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया.

उदाकिशुनगंज (मधेपुरा). अनुमंडल मुख्यालय स्थित हरिहर साहा महाविद्यालय के उर्दू विभाग में सेमेस्टर छह के छात्र-छात्राओं के सेमिनार प्रस्तुतीकरण के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. डॉ. जवाहर पासवान ने की, जबकि संचालन उर्दू विभागाध्यक्ष सरवर मेहदी ने किया. कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने उर्दू भाषा, साहित्य और संस्कृति से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार रखने के साथ गीत, नज्म और गजल की प्रस्तुतियां दीं.

सर सैयद और अल्लामा इकबाल के विचारों पर छात्रों ने रखे विचार

सेमिनार के दौरान छात्र-छात्राओं ने सर सैयद अहमद खां और अल्लामा इकबाल के कला, दर्शन, काव्य, गद्य और संघर्ष समेत विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए. मो. सरफराज ने ‘उर्दू एक मुश्तरका तहजीब’ विषय पर प्रभावी भाषण दिया. वहीं मो. आमिर हकीम ने उर्दू के इतिहास को नज्म के रूप में प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी.

‘बच्चे की दुआ’ और गजल की प्रस्तुति ने मोहा मन

सना और नासरीन ने सामूहिक रूप से अल्लामा इकबाल की प्रसिद्ध नज्म ‘बच्चे की दुआ’ प्रस्तुत की. नाजदा परवीन ने गजल पेश कर श्रोताओं का मन मोह लिया. रानी खातून, रुकैया, तबस्सुम, रोशनी, नगमा, निजाम, नर्गिस परवीन और फरहत परवीन ने नज्म एवं नस्र की विभिन्न विधाओं में अपनी प्रतिभा और कौशल का प्रदर्शन किया.

उर्दू भाषा की मिठास और सांस्कृतिक विरासत पर चर्चा

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. विश्वजीत प्रकाश ने उर्दू भाषा की मनमोहक मिठास का उल्लेख किया. डॉ. नागेश्वर दास ने हिंदी और उर्दू की पारस्परिक सहयात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बिहार की दूसरी राजभाषा उर्दू को जानने और समझने का प्रयास किया जाना चाहिए.

मातृभाषा के महत्व पर दिया जोर

डॉ. अजय कुमार ने नई शिक्षा नीति में मातृभाषा के महत्व को रेखांकित किया. डॉ. बदर राज और डॉ. अरुण कुमार साह ने कहा कि दैनिक जीवन में लोग सहज रूप से अनेक उर्दू शब्दों का प्रयोग करते हैं. उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में उर्दू भाषा के योगदान पर भी प्रकाश डाला.

शिक्षकों और छात्रों की रही सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम के दौरान छात्र मोहम्मद आजाद ने भी संचालन में सहयोग किया. अंत में उर्दू विभागाध्यक्ष सरवर मेहदी ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कार्यक्रम के समापन की घोषणा की. इस अवसर पर डॉ. अरविंद कुमार, प्रधान सहायक चंदन, ललन सहित महाविद्यालय के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थे.

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लेखक के बारे में

By कौनैन वशीर

कौनैन वशीर प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. वर्ष 2001 में अमर उजाला से पत्रकारिता की शुरुआत की. अभी उदाकिशनगंज (मधेपुरा) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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