मधेपुरा: ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4% MDR से मुरलीगंज के व्यापारी चिंतित, 15 अक्टूबर से लागू होगी नई व्यवस्था

₹2000 से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने से मुरलीगंज के व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है. यह नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगी, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स, किराना और कपड़ा व्यवसायी मुनाफे पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंतित हैं.

मधेपुरा, मुरलीगंज. दो हजार रुपये से अधिक के पात्र UPI मर्चेंट भुगतान पर 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate यानी MDR लागू किए जाने की घोषणा के बाद मुरलीगंज के कारोबारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है. नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने की जानकारी वित्तीय सेवा विभाग की ओर से जारी की गई है. इसके तहत दो हजार रुपये तक के पात्र UPI P2M भुगतान पर MDR नहीं लगेगा, जबकि अधिक राशि वाले पात्र लेन-देन पर निर्धारित दर के अनुसार शुल्क लागू होगा. इस बदलाव को लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स, थोक किराना और कपड़ा कारोबारियों का कहना है कि बड़े डिजिटल भुगतान उनके कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. ऐसे में भुगतान पर व्यापारी के स्तर पर आने वाली अतिरिक्त लागत का असर मुनाफे और कीमत तय करने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है. हालांकि, नई व्यवस्था में इस लागत को सीधे ग्राहक से 0.4 प्रतिशत के रूप में वसूलने की अनुमति नहीं होने की बात वित्तीय सेवा विभाग की FAQ में स्पष्ट की गई है.

टीवी, फ्रिज और एसी खरीद में बड़े UPI भुगतान की चिंता

मुरलीगंज के इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारियों का कहना है कि टीवी, फ्रिज, एसी और कूलर जैसे सामानों की खरीद में भुगतान अक्सर दो हजार रुपये से काफी अधिक होता है. ऐसे में डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर यदि व्यापारी की लागत बढ़ती है, तो लंबे समय तक इस लागत को अपने मुनाफे से वहन करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है. कारोबारियों का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में प्रतिस्पर्धा पहले से ही अधिक है. ग्राहक कीमत की तुलना करके खरीदारी करते हैं. ऐसे में व्यापारी के लिए अतिरिक्त लागत को पूरी तरह अपने मार्जिन में समायोजित करना हमेशा आसान नहीं होगा.

चैंबर पदाधिकारी बोले, कारोबार की लागत से पूरी तरह अलग रखना मुश्किल

चैंबर ऑफ कॉमर्स के कोषाध्यक्ष सूरज जायसवाल ने कहा कि यदि व्यापारी पर कोई अतिरिक्त लागत आती है, तो उसे कारोबार की पूरी लागत से अलग रखना मुश्किल होता है. कारोबारी को यह देखना पड़ता है कि बढ़ी हुई लागत को किस तरह समायोजित किया जाए. उनके मुताबिक बाजार में अंतिम कीमत तय करते समय खरीद लागत, संचालन खर्च, प्रतिस्पर्धा और मार्जिन जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखना पड़ता है. ऐसे में नई MDR व्यवस्था का प्रभाव अलग-अलग कारोबार में अलग हो सकता है.

थोक किराना कारोबारियों के सामने अलग चुनौती

थोक किराना कारोबारियों का कहना है कि रोजमर्रा की छोटी खरीद और शादी-विवाह या बड़े आयोजनों की खरीदारी में काफी अंतर होता है. सामान्य ग्राहक कम राशि का भुगतान कर सकता है, लेकिन बड़े आयोजनों के लिए एक साथ हजारों रुपये का सामान खरीदा जाता है. एक थोक कारोबारी ने कहा कि ग्राहक को यह आसानी से दिखाई नहीं देगा कि किसी उत्पाद की कीमत में कौन सी लागत शामिल है. कारोबारी का पूरा कारोबार लागत और मार्जिन के आधार पर चलता है. इसलिए बड़े डिजिटल लेन-देन पर आने वाली लागत का असर कीमत निर्धारण पर पड़ने की आशंका है.

कपड़ा कारोबारियों को भी मार्जिन पर असर की आशंका

कपड़ा कारोबारियों ने भी नई व्यवस्था को लेकर इसी तरह की चिंता जताई है. उनका कहना है कि बाजार में यह पता लगाना आसान नहीं होगा कि किसी व्यापारी ने किस मद में कितनी लागत जोड़ी है.

थोक किराना विक्रेता सूरज पंसारी ने कहा कि 0.4 प्रतिशत MDR का असर छोटे और मध्यम कारोबारियों के मार्जिन पर पड़ सकता है. प्रतिस्पर्धी बाजार में जहां कीमतों को लेकर पहले से दबाव रहता है, वहां अतिरिक्त लागत को समायोजित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

ग्राहक से सीधे 0.4 प्रतिशत वसूली नहीं होगी

नई व्यवस्था को लेकर कारोबारियों और ग्राहकों के बीच सबसे महत्वपूर्ण बात शुल्क के स्वरूप को समझना है. वित्तीय सेवा विभाग की FAQ के अनुसार MDR मर्चेंट पर लागू होगा और व्यापारी इसे ग्राहक से सीधे नहीं वसूल सकता. दो हजार रुपये तक के पात्र UPI P2M भुगतान पर शुल्क नहीं होगा. इसलिए इसे इस तरह नहीं देखा जाना चाहिए कि दो हजार रुपये से अधिक का UPI भुगतान करने वाले ग्राहक से सीधे 0.4 प्रतिशत अतिरिक्त राशि ली जाएगी. चिंता मुख्य रूप से व्यापारी के स्तर पर आने वाली लागत और उसके संभावित व्यावसायिक प्रभाव को लेकर है.

15 अक्टूबर से बदलाव पर कारोबारियों की नजर

नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है. ऐसे में मुरलीगंज के कारोबारियों की नजर अब इसके वास्तविक प्रभाव पर है. बड़े भुगतान वाले कारोबार, छोटे और मध्यम व्यापारियों के मार्जिन तथा डिजिटल भुगतान के व्यवहार पर इसका क्या असर पड़ता है, यह व्यवस्था लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा. UPI के जरिए देश में बड़े पैमाने पर डिजिटल भुगतान हो रहे हैं. NPCI के आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में UPI पर करीब 24,508.96 मिलियन यानी 2,450.90 करोड़ लेन-देन दर्ज हुए, जिनका कुल मूल्य करीब 29.82 लाख करोड़ रुपये था. ऐसे में मुरलीगंज जैसे स्थानीय बाजारों में कारोबारी नई MDR व्यवस्था को लेकर लागत, मार्जिन और ग्राहकों के भुगतान व्यवहार पर संभावित असर का आकलन कर रहे हैं.

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By Sanjay kumar

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