स्कूल में पढ़ाई से लेकर घर की भूमिका तक, 29 अगस्त की शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी क्यों है खास?

मधेपुरा के उदाकिशुनगंज प्रखंड में 29 अगस्त को शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी का आयोजन होगा. इसका उद्देश्य बच्चों की शैक्षणिक प्रगति और व्यवहार में सुधार लाना है. शिक्षकों और अभिभावकों को मिलकर बच्चों की शिक्षा पर चर्चा करने का यह एक महत्वपूर्ण अवसर है.

Madhepura News: मधेपुरा में बच्चों की पढ़ाई केवल स्कूल तक सीमित नहीं है. घर और विद्यालय के बीच बेहतर तालमेल हो, तो बच्चों की शैक्षणिक प्रगति और व्यवहार में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है. इसी उद्देश्य से 29 अगस्त को उदाकिशुनगंज प्रखंड के सभी विद्यालयों में शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी आयोजित की जायेगी.

संगोष्ठी को सफल बनाने के लिए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सागर कुमार चौधरी ने प्रखंड स्तरीय प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग टेक्निकल टीम के साथ बैठक की. बैठक में आयोजन की तैयारी और व्यापक प्रचार-प्रसार की रणनीति बनायी गयी. इसके लिए टीम के सदस्यों को अलग-अलग पंचायतों की जिम्मेदारी सौंपी गयी.

बीईओ ने अभिभावकों से की खास अपील

बीईओ सागर कुमार चौधरी ने प्रखंड क्षेत्र के सभी अभिभावकों से 29 अगस्त को अपने बच्चों के विद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की.

उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे का अधिकार है. बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की जिम्मेदारी केवल शिक्षकों की नहीं, बल्कि अभिभावकों की भी है. घर में बच्चे की पढ़ाई, स्कूल में उसकी उपस्थिति और उसके व्यवहार पर अभिभावकों की नजर रहे, तो कई समस्याओं का समय रहते समाधान किया जा सकता है.

उन्होंने शिक्षकों से भी अपने कर्तव्य और दायित्व का पूरी निष्ठा से निर्वहन करने को कहा. साथ ही स्पष्ट किया कि संगोष्ठी के आयोजन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी.

सिर्फ बैठक नहीं, बच्चों की पढ़ाई पर होगी सीधी चर्चा

शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी का उद्देश्य केवल औपचारिक बैठक करना नहीं है. इसके माध्यम से शिक्षक और अभिभावक बच्चों की वास्तविक शैक्षणिक स्थिति पर आपस में बातचीत कर सकेंगे.

बीईओ ने कहा कि शिक्षक और अभिभावकों के बीच नियमित संवाद से बच्चों की शैक्षणिक प्रगति, उपस्थिति, व्यवहार और सीखने की क्षमता में सुधार लाया जा सकता है.

अभिभावकों को भी यह समझने का अवसर मिलेगा कि उनका बच्चा स्कूल में किस तरह पढ़ रहा है, किन विषयों में बेहतर कर रहा है और किन क्षेत्रों में उसे अतिरिक्त सहयोग की जरूरत है.

पंचायतवार बांटी गयी प्रचार की जिम्मेदारी

संगोष्ठी को लेकर प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी भी पंचायतवार बांटी गयी है. शैलेश कुमार चौरसिया को जौतेली, मंजौरा, बीरीरणपाल, लश्करी और मधुवन पंचायत की जिम्मेदारी दी गयी है.

बंदना कुमारी को खाड़ा, बुधमा, नयानगर, शाहजादपुर और पिपरा करौती पंचायत में प्रचार की जिम्मेदारी मिली है. मंजर आलम नगर परिषद उदाकिशुनगंज में प्रचार का काम देखेंगे.

वहीं सुनील कुमार चौरसिया को आनंदपुरा और बराही तथा वर्षा कुमारी को गोपालपुर पंचायत की जिम्मेदारी सौंपी गयी है.

स्कूल और समाज के बीच मजबूत होगा संबंध

शैलेश कुमार चौरसिया ने कहा कि शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी शिक्षक और अभिभावकों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम है. इसके माध्यम से बच्चों की शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण सुधार लाने में मदद मिली है.

उन्होंने कहा कि यह सरकार की महत्वपूर्ण पहल है. इसके जरिए अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई और विद्यालय की गतिविधियों से सीधे जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.

जब अभिभावक स्कूल की गतिविधियों से जुड़ते हैं, तो बच्चों के प्रति उनकी जिम्मेदारी और जागरूकता भी बढ़ती है. इससे विद्यालय और समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है.

संयुक्त प्रयास से शिक्षा व्यवस्था को मिलेगी मजबूती

अनुमंडल माध्यमिक शिक्षक संघ की प्रतिनिधि अमृता कुमारी ने कहा कि शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी के माध्यम से मधेपुरा जिले में शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक, अभिभावक और समाज के संयुक्त प्रयासों को मजबूती मिली है.

उन्होंने कहा कि बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए केवल स्कूल में शिक्षक का प्रयास पर्याप्त नहीं है. परिवार और समाज का सहयोग भी उतना ही जरूरी है. संगोष्ठी इसी सहभागिता को मजबूत करने का माध्यम बन रही है.

Madhepura News: आयोजन को सफल बनाने में जुटे शिक्षक-कर्मी

संगोष्ठी के प्रचार-प्रसार और आयोजन को सफल बनाने के लिए शिक्षक और कर्मी सक्रिय रूप से जुटे हैं. शैलेश कुमार चौरसिया, अमृता कुमारी, बंदना कुमारी, मंजर आलम, सुनील कुमार चौरसिया, विजय कुमार पासवान, कंचनमाला, चंद्रभूषण पासवान, सियाराम मोची, कुमोद दास, महालीकांत झा, संजीव सिंह, स्मृति, पुरुषोत्तम कुमार, बिपिन बिहारी गुप्ता, संजय कुमार, पुतुल कुमार, संजय प्रताप, अरुण कुमार, ललन कुमार, दीनबंधु, कियामुद्दीन, मजहर आलम, सुमन कुमार, पंकज कुमार सहित अन्य शिक्षक और कर्मी तैयारी में जुटे हैं.

29 अगस्त की संगोष्ठी में अभिभावकों की भागीदारी कितनी रहती है और स्कूल स्तर पर बच्चों की शिक्षा को लेकर क्या ठोस चर्चा होती है, यह आयोजन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होगी.

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लेखक के बारे में

By कौनैन वशीर

कौनैन वशीर प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. वर्ष 2001 में अमर उजाला से पत्रकारिता की शुरुआत की. अभी उदाकिशनगंज (मधेपुरा) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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