शिव कथा धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का माध्यम- बापू

शिव कथा धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का माध्यम- बापू

सिंहेश्वर, मधेपुरा सिंहेश्वर के मेला ग्राउंड में आयोजित 11 दिवसीय शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली. दूर-दराज से आये हजारों भक्तों ने कथा का श्रवण किया. प्रसिद्ध कथावाचक मोरारी बापू ने संगीतमय शैली में शिव कथा का महात्म्य बताते हुये भगवान शिव की उत्पत्ति एवं ज्योतिर्लिंगों की महिमा का विस्तार से वर्णन किया. कथा के दौरान भजनों की मधुर प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया. बापू ने कहा कि शिव कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का माध्यम है. उन्होंने बताया कि सद्गुरु ही मनुष्य को परमात्मा का बोध कराते हैं और जीवन में सफलता का मार्ग दिखाते हैं. अपने प्रवचन में उन्होंने समाज में बढ़ती ईर्ष्या, द्वेष और नफरत पर चिंता जताते हुये कहा कि इनसे मुक्ति पाने के लिए प्रेम, सहनशीलता एवं शांति को अपनाना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि सच्चा भक्त अपने आचरण से समाज को प्रेरित करता है. मोरारी बापू ने माता-पिता एवं गुरुओं के सम्मान पर विशेष जोर देते हुये कहा कि उनके प्रति आदर ही मनुष्य को श्रेष्ठ बनाता है. माता-पिता एवं गुरु के सामने सिर झुकाने से न केवल आयु बढ़ती है. बल्कि जीवन में सकारात्मकता भी आती है. पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव पर उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा और विदेश जाना गलत नहीं है. लेकिन अपनी संस्कृति एवं संस्कारों को नहीं छोड़ना चाहिये. बच्चों को सनातन मूल्यों, मर्यादा और बुजुर्गों के सम्मान की शिक्षा देना आवश्यक है. कथा में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति एवं ज्ञान के इस संगम का लाभ उठाया. आयोजकों के अनुसार आगामी दिनों में भी कथा में इसी तरह बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है.

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By Kumar Ashish

Kumar Ashish is a contributor at Prabhat Khabar.

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