मधेपुरा सिविल कोर्ट में 18 जुलाई को विशेष लोक अदालत: चेक बाउंस के मामलों के निपटारे को लेकर जिला जज ने दिए निर्देश

मधेपुरा सिविल कोर्ट में 18 जुलाई को चेक बाउंस के मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा. जिला जज के निर्देश पर 113 मामलों को चिन्हित कर नोटिस भेजा गया है.

सिविल कोर्ट के मीटिंग हॉल में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष-सह-प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (जिला जज) गुरविंदर सिंह मल्होत्रा ने न्यायिक पदाधिकारियों को चेक बाउंस से जुड़े अधिक से अधिक मामलों का निष्पादन सुनिश्चित करने का कड़ा निर्देश दिया है.

आपसी सहमति से मुकदमों के त्वरित निपटारे पर जोर

जिला जज गुरविंदर सिंह मल्होत्रा ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि लोक अदालत आपसी सहमति के आधार पर विवादों के त्वरित और सरल समाधान का एक बेहद प्रभावी माध्यम है. उन्होंने सभी न्यायिक पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे लंबित मामलों के निष्पादन में सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि अदालतों के चक्कर काट रहे अधिक से अधिक पक्षकारों को इसका सीधा लाभ मिल सके और उन्हें समय पर न्याय मिल पाए.

चेक बाउंस के 113 मामले चिन्हित, दोनों पक्षों को भेजे गए नोटिस

बैठक में मामलों के वर्गीकरण और तैयारियों का ब्योरा प्राधिकार की सचिव द्वारा साझा किया गया:

  • लंबित मुकदमों का आंकड़ा: जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव-सह-जज पूजा कुमारी साह ने बताया कि जिले में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act), 1881 की धारा 138 (चेक बाउंस) के तहत कुल 253 मामले वर्तमान में लंबित हैं.
  • चिन्हित मामले और नोटिस: इनमें से त्वरित निष्पादन के लिए 113 मामलों को विशेष रूप से चिन्हित किया गया है. इसके साथ ही, विवादों के निपटारे के लिए 236 मामलों से संबंधित सूचकों और अन्य पक्षकारों को आधिकारिक नोटिस तामिला कराया गया है, ताकि वे तय तिथि पर उपस्थित होकर आपसी समझौते से मामला सुलझा सकें.

मधेपुरा और अनुमंडल न्यायालय में बनीं विशेष बेंच, वीसी से भी समीक्षा

18 जुलाई को आयोजित होने वाली इस विशेष लोक अदालत को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सिविल कोर्ट मधेपुरा में एक बेंच और अनुमंडल न्यायालय में एक बेंच का गठन किया गया है. इन सभी बेंचों पर केवल आपसी समझौते के योग्य मामलों की ही सुनवाई कर उनका ऑन-द-स्पॉट निपटारा किया जाएगा. इस दौरान जिला जज ने अन्य दूरस्थ न्यायालयों के न्यायिक पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से भी तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए.

"अदालतों में मुकदमों के बढ़ते बोझ को कम करने और जनता को त्वरित राहत देने में लोक अदालत की भूमिका अतुलनीय है. चेक बाउंस जैसे मामलों में दोनों पक्षों की सहमति से विवाद को हमेशा के लिए खत्म करने का यह एक बेहतरीन अवसर है." — पूजा कुमारी साह, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, मधेपुरा

इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) नूतन कुमारी, एसडीजेएम (SDJM) सुनील मिश्रा, एसीजेएम (ACJM) प्रथम विकास मिश्रा सहित जिले के तमाम वरिष्ठ न्यायिक पदाधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित थे.


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