Shankarpur THR Distribution: मधेपुरा में आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिलने वाले टेक होम राशन यानी टीएचआर को लेकर शंकरपुर में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरी व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अगस्त 2026 के टीएचआर और पोषाहार की राशि निकासी व वितरण का आदेश जारी होने से पहले ही पोषण ट्रैकर पर 67.52 प्रतिशत टीएचआर वितरण दर्ज हो गया.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब वितरण का आदेश ही जारी नहीं हुआ था, तो पोषण ट्रैकर पर 67.52 प्रतिशत वितरण की एंट्री आखिर किस आधार पर कर दी गयी. क्या लाभुकों को वास्तव में टीएचआर मिल चुका था या ऑनलाइन रिकॉर्ड में ही वितरण पूरा कर दिया गया. यही सवाल अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है.
आदेश से पहले एंट्री ने बढ़ाया संदेह
बाल विकास परियोजना कार्यालय शंकरपुर की कार्यशैली को लेकर यह मामला सामने आया है. अगस्त माह के टीएचआर और पोषाहार की राशि निकासी एवं वितरण से संबंधित आदेश जारी होने से पहले पोषण ट्रैकर पर बड़ी संख्या में लाभुकों को टीएचआर वितरण की जानकारी दर्ज कर दी गयी.
इससे आंगनबाड़ी केंद्रों पर वास्तविक स्थिति और ऑनलाइन रिकॉर्ड के बीच अंतर होने की आशंका पैदा हो गयी है. स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहा है कि यदि अभी वितरण की प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई थी, तो पोषण ट्रैकर पर वितरण का प्रतिशत इतनी तेजी से कैसे बढ़ गया.
पोषण ट्रैकर पर एंट्री का है पूरा सिस्टम
विभागीय व्यवस्था के अनुसार पोषण ट्रैकर पर टीएचआर वितरण की जानकारी वास्तविक वितरण के बाद दर्ज की जानी चाहिए. लाभुक को टीएचआर मिलने के बाद एफआरएस के माध्यम से इसकी एंट्री की जाती है.
ऐसे में वितरण आदेश से पहले ही 67.52 प्रतिशत वितरण दर्ज होना सामान्य प्रक्रिया से अलग दिखाई दे रहा है. यही वजह है कि अब पोषण ट्रैकर पर दर्ज आंकड़ों की वास्तविकता की जांच कराने की मांग उठ रही है.
अगर राशन मिला ही नहीं तो ऑनलाइन रिकॉर्ड में कैसे पहुंचा?
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू लाभुकों से जुड़ा है. आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से मिलने वाला टीएचआर कई परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है. ऐसे में ऑनलाइन रिकॉर्ड में वितरण दिखने और वास्तविक रूप से लाभुक तक राशन पहुंचने के बीच अंतर हुआ, तो इसका सीधा असर सरकारी योजना की पारदर्शिता पर पड़ेगा.
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर किसी लाभुक को अगस्त का टीएचआर नहीं मिला और पोषण ट्रैकर पर उसके नाम के सामने वितरण दर्ज हो गया, तो उसके हिस्से का राशन कहां गया. वहीं, यदि लाभुकों को वास्तव में टीएचआर मिल चुका है, तो आदेश जारी होने से पहले वितरण और ऑनलाइन एंट्री किस प्रक्रिया के तहत हुई, इसका जवाब भी जरूरी है.
आंगनबाड़ी कर्मियों के बीच भी चर्चा
मामले को लेकर आंगनबाड़ी कर्मियों के बीच भी चर्चा है. सवाल यह है कि वास्तविक वितरण और पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों का मिलान किस स्तर पर किया जाता है.
यदि बिना वास्तविक वितरण के ऑनलाइन एंट्री की गयी है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी. क्या ऐसी एंट्री के आधार पर विभाग को अगस्त महीने के टीएचआर वितरण की गलत तस्वीर भेजी गयी है. इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.
सिर्फ आंकड़े नहीं, लाभुकों से भी हो सत्यापन
स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि पोषण ट्रैकर पर दर्ज 67.52 प्रतिशत वितरण का सिर्फ कागजी मिलान नहीं कराया जाए, बल्कि लाभुकों से भी इसका सत्यापन कराया जाए. संबंधित आंगनबाड़ी केंद्रों के रिकॉर्ड और पोषण ट्रैकर की एंट्री का मिलान होने के साथ यह भी देखा जाए कि कितने लाभुकों को वास्तव में टीएचआर मिला.
इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि पोर्टल पर दर्ज आंकड़ा वास्तविक वितरण को दर्शाता है या नहीं.
Shankarpur THR Distribution: जांच से खुलेगा रिकॉर्ड का सच
मामले में सबसे महत्वपूर्ण अब यह देखना होगा कि 67.52 प्रतिशत वितरण की एंट्री कब, किस स्तर से और किस आधार पर की गयी. यदि जांच में सामने आता है कि वास्तविक वितरण से पहले ही पोषण ट्रैकर पर एंट्री कर दी गयी, तो यह पारदर्शिता और विभागीय प्रक्रिया दोनों के लिए गंभीर सवाल होगा.
वहीं, यदि विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार वितरण वास्तव में हुआ है, तो आदेश जारी होने की तारीख और वितरण की प्रक्रिया को स्पष्ट करना होगा. फिलहाल पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच और रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद ही सामने आएगी.
