राज्य में गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा के बड़े-बड़े प्रशासनिक दावों के बीच मधेपुरा के उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बेरवा की जमीनी हकीकत शिक्षा तंत्र की बदहाली को उजागर कर रही है. इस विद्यालय में कक्षा 1 से 8 तक कुल 159 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन उनके पठन-पाठन के लिए स्कूल में महज दो पक्के कमरे और एक कामचलाऊ टीन शेड उपलब्ध है. तपती गर्मी और उमस के बीच बच्चे टीन शेड के नीचे बैठकर पढ़ने को विवश हैं.
एक कमरे में पांच कक्षाएं, शोर के बीच पढ़ाई
विद्यालय में प्रधानाध्यापक समेत कुल पांच शिक्षकों की तैनाती है. कमरों की भारी कमी के कारण शिक्षण व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है:
- कक्षा 1 से 5 की स्थिति: एक कमरे में पहली से पांचवीं कक्षा तक के सभी बच्चों को एक साथ बैठाया जाता है, जिन्हें संभालने की जिम्मेदारी दो शिक्षकों पर है.
- कक्षा 6 से 8 की स्थिति: दूसरे कमरे में छठवीं, सातवीं और आठवीं के छात्र-छात्राएं एक साथ बैठते हैं.
एक ही कमरे में अलग-अलग विषयों और अलग-अलग कक्षाओं की पढ़ाई साथ चलने से भारी अव्यवस्था फैलती है. कहीं गणित का पाठ चल रहा होता है तो कहीं भाषा का, जिससे भारी शोरगुल के बीच बच्चों का ध्यान भटकना स्वाभाविक है. शिक्षक राधेश्याम राम ने बताया कि एक कमरे में कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और समय पर सिलेबस पूरा कराना नामुमकिन हो जाता है.
स्वीकृत राशि वापस लौटी, जमीन का नहीं निकला समाधान
प्रधानाध्यापक प्रमोद कुमार ने बताया कि स्कूल भवन निर्माण के लिए विभाग को कई बार पत्राचार किया गया.
विभाग की ओर से भवन निर्माण के लिए राशि भी स्वीकृत होकर आ गई थी, लेकिन विडंबना यह रही कि स्कूल के पास अतिरिक्त जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी. जमीन की अनुपलब्धता के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया और अंततः स्वीकृत फंड वापस लौट गया.
प्रशासनिक उदासीनता पर उठते सवाल
विद्यालय में कुल 159 छात्र नामांकित हैं, जिनमें से औसतन 90 से 110 छात्र प्रतिदिन उपस्थित रहते हैं.
प्रशासनिक स्तर पर जमीन की व्यवस्था न होने के कारण निर्माण राशि का वापस लौट जाना पूरी व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है. अधिकारी अक्सर मामले के संज्ञान में होने और जल्द सुधार की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं, लेकिन धरातल पर बच्चे तपते टीन शेड और बदहाल कमरों में ही अपना भविष्य तलाशने को मजबूर हैं.
