सूचना का अधिकार भी है नागरिकों का मौलिक अधिकार

सूचना का अधिकार भी है नागरिकों का मौलिक अधिकार

प्रतिनिधि , मधेपुरा

जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से मधेपुरा मंडल कारा में कैदियों को सूचना का अधिकार व नागरिकों के मौलिक कर्तव्य के बारे में जानकारी दी. कार्यक्रम में मंडल कारा उपाधीक्षक संजय कुमार गुप्ता, जेल प्रभारी सुमित कुमार व डीएलएसए के पीएलवी मोहन कुमार मौजूद थे. मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद एलएडीसीएस के चीफ सीपी चंदन ने सूचना का अधिकार व नागरिकों के मौलिक के कर्तव्य पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 में सशक्त रूप में लागू किया गया. जिसका मूल उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना, सरकार के कार्य में पारदर्शिता व उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना, भ्रष्टाचार को नियंत्रित करना तथा लोकतंत्र को लोगों के बीच कामयाब बनाना है. सरकारी दफ्तरों व सार्वजनिक प्राधिकारों में देश के नागरिक इस कानून के तहत सूचना पाने का अधिकार रखते हैं. सूचना का अधिकार भी नागरिकों का मौलिक अधिकार है. हालांकि इस कानून के तहत संवेदनशील व राष्ट्रीय एकता व अखंडता से संबंधित गोपनीय सूचना नहीं दी जाती है. उन्होंने कहा कि मौलिक अधिकार हमारा कानूनी अधिकार है, लेकिन मौलिक कर्तव्य हमारा दायित्व है. हमारे 11 मौलिक कर्तव्य हैं. सभी कर्तव्यों का पवित्र उद्देश्य है. भारतीय संविधान का पालन करना, अपने राष्ट्रध्वज का सम्मान करना, राष्ट्रगान के प्रति सम्मान की भावना रखना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना व छह वर्ष से 14 वर्ष के बच्चों को निश्चित रूप से शिक्षा देना है. उन्होंने कहा कि अपने इस अधिकार का उपयोग करते समय दूसरों के अधिकार की रक्षा करना भी हमारा मूल कर्तव्य है.

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