Dinabhadri Mela: मधेपुरा में लश्करी पंचायत के पंछगछिया गांव में लोक आस्था और संस्कृति का रंग देखने को मिल रहा है. वार्ड संख्या 11 में तीन दिवसीय दीनाभद्री मेला शुरू हो गया है. लोक देवता दीनाभद्री के जन्मोत्सव के साथ शुरू हुए मेले में 72 घंटे के अष्टयाम समेत कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं.
मेला शुरू होते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचने लगे हैं. पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और लोक सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गांव का माहौल भक्तिमय हो गया है. खासकर महादलित समुदाय में मेले को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है.
जन्मोत्सव के बाद शुरू हुई पूजा-अर्चना
मेला मालिक सुरेश ऋषिदेव ने बताया कि शुक्रवार रात लोक देवता दीनाभद्री का जन्मोत्सव मनाया गया. इसके बाद विधिवत पूजा-अर्चना शुरू हुई. श्रद्धालु मेला परिसर में स्थापित विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के दर्शन और पूजा के लिए पहुंच रहे हैं.
तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ भक्ति और लोक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम भी होंगे.
मुसहर समाज में दीनाभद्री के प्रति विशेष आस्था
दीनाभद्री की पूजा खास तौर पर महादलित समुदाय और मुसहर समाज के बीच विशेष श्रद्धा के साथ की जाती है. कोसी और सीमांचल क्षेत्र में उन्हें लोक देवता के रूप में पूजा जाता है.
समाज के लोगों की मान्यता है कि दीनाभद्री मनुष्य के रूप में अवतरित हुए थे. बाद में उनमें ईश्वरीय गुण दिखाई देने लगे, जिसके बाद लोगों ने उन्हें लोक देवता के रूप में स्वीकार कर उनकी पूजा शुरू की.
यही लोक आस्था पीढ़ियों से इस मेले को जोड़ती आ रही है. मेले के दौरान बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना के साथ इस परंपरा का हिस्सा बनते हैं.
भजन-कीर्तन से लेकर भक्ति नाटक तक होंगे कार्यक्रम
मेले में 72 घंटे का अष्टयाम आयोजित किया जा रहा है. इसके अलावा भजन-कीर्तन, रामधुन, भक्ति नाटक और नृत्य सहित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे.
इससे मेले में केवल पूजा-अर्चना ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिल रही है. दिनभर मेला परिसर में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की चहल-पहल बनी हुई है.
बच्चों के लिए झूले और खिलौनों की दुकान आकर्षण
मेला परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है. श्रद्धालुओं के लिए पूजा सामग्री और अन्य सामान की दुकानों के साथ बच्चों के लिए खेल-खिलौनों की दुकानें भी लगायी गयी हैं.
झूले बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. धार्मिक आयोजन के साथ मनोरंजन की व्यवस्था होने से परिवार के साथ पहुंचने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ रही है.
महादलित समुदाय में खासा उत्साह
दीनाभद्री मेला स्थानीय लोगों के लिए धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का भी अवसर है. खासकर महादलित समुदाय के लोगों में मेले को लेकर खासा उत्साह है.
मेले में पहुंच रहे लोग पूजा-अर्चना के साथ एक-दूसरे से मिल रहे हैं. गांव और आसपास के इलाके में आयोजन को लेकर दिनभर चहल-पहल बनी हुई है.
Dinabhadri Mela: कमेटी के सदस्य संभाल रहे व्यवस्था
मेले को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मेला मालिक सुरेश ऋषिदेव के साथ कमेटी के सदस्य सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. रामफल ऋषिदेव, शंकर ऋषिदेव, दिलीप ऋषिदेव, सुरेन ऋषिदेव, बाबलू ऋषिदेव, घुरन ऋषिदेव, साजन ऋषिदेव और उपेंद्र ऋषिदेव सहित अन्य सदस्य मेला परिसर की व्यवस्था संभाल रहे हैं.
तीन दिनों तक चलने वाले इस मेले में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी रहने की उम्मीद है.
