शिक्षा का अधिकार तो मिला, लेकिन सुविधा अब भी अधूरी, शंकरपुर के बच्चों का आखिर कब बदलेगा भविष्य
शंकरपुर,
प्रखंड की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है. प्रखंड के कुल 86 विद्यालयों में से 12 विद्यालय भवनविहीन हैं, जहां नौनिहाल बच्चे खुले आसमान के नीचे या जर्जर अस्थायी ढांचे में पढ़ने को मजबूर हैं. यह हाल तब है, जब सरकार शिक्षा को प्राथमिकता देने का दावा करती है. प्रखंड शिक्षा कार्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार प्रखंड क्षेत्र के विद्यालयों में कक्षा एक से 12वीं तक कुल लगभग 18,621 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. इनमें कक्षा एक से पांच तक करीब 11,147, कक्षा छह से आठ तक 5,407 तथा कक्षा नौ से 12वीं तक लगभग 2,067 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं.कक्षा एक से पांच एवं नौ से बारहवी में वर्तमान में नामांकन जारी है. इतनी बड़ी संख्या के बावजूद बुनियादी सुविधाओं का अभाव बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है. “जहां चाह, वहां राह” की कहावत तभी सार्थक होगी, जब शिक्षा के मंदिर को मजबूत नींव और छत मिले. अभी के हालात में यह कहना गलत नहीं होगा कि इन बच्चों का भविष्य भी अधर में लटका हुआ है. शिक्षकों की बात करें तो पूरे प्रखंड में लगभग 715 शिक्षक पदस्थापित हैं, जो आवश्यक संख्या से काफी कम है. विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी के कारण उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है.
भवनविहीन विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों को हर मौसम में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. तेज धूप में खुले में बैठकर पढ़ाई, बारिश में छुट्टी और सर्दी में ठिठुरते हुए पढ़ना-यहां के बच्चों की मजबूरी बन गयी है. अभिभावकों में भी इस स्थिति को लेकर भारी नाराजगी है.– नव प्राथमिक विद्यालय नटकवा डीह में पदस्थापित शिक्षिका एवं बच्चे शौचालय के लिए होते है लज्जित -सोनवर्षा पंचायत के नव प्राथमिक विद्यालय में आधा दर्जन के लगभग शिक्षिका पदस्थापित है. विद्यालय समयावधि में सोच के लिए जहां उन लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. वहीं विद्यालय में अध्ययनरत बच्चे को खुले में सोच करने के लिए मजबूर होना पड़ता है. उक्त विद्यालय में वर्ग एक से पांच तक 123 छात्र-छात्रा नामांकित है. विद्यालय में कुल छह शिक्षक पदस्थापित है. विद्यालय का स्थापना वर्ष 2006 में हुई है. विद्यालय टीन के शेड में संचालित है. विद्यालय में न तो शौचालय है न ही मध्यान भोजन बनाने के लिए किचेन शेड है ओर न ही विद्यालय में घेराबंदी है. इस वजह से जहां शिक्षक को विद्यालय संचालन के समय बच्चों के साथ किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो, इससे शिक्षक सहमे रहते है. — वर्जन —
विद्यालय को अपना जमीन उपलब्ध है. विद्यालय का संचालन टीन के शेड में किया जा रहा है. विद्यालय में न तो शौचालय है और न ही घेराबंदी है. इन सभी समस्या को लेकर कई बार विभाग को अवगत करा चुके है.प्रिया भारती, प्रधानाध्यापक, नव प्राथमिक विद्यालय नटकवा डीह, सोनवर्षा, शंकरपुर— वर्जन —भवनहीन विद्यालय में भवन निर्माण हेतु जिले के वरीय अधिकारी को अवगत करा चुके है. जल्द भवन निर्माण सहित अन्य समस्या दूर करवाया जायेगा.
विजय कुमार रजक, प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, शंकरपुर, मधेपुरा.