Madhepura News: मधेपुरा में मिठाही पंचायत के बैरवा स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय बैरवा के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों ने नशामुक्त समाज के लिए जागरूकता प्रभातफेरी निकाली. इस दौरान बच्चों ने ग्रामीणों से नशे से दूर रहने की अपील की और आसपास के लोगों को भी इसके खिलाफ जागरूक करने का संदेश दिया.
यह आयोजन केवल एक दिन की प्रभातफेरी तक सीमित नहीं है. पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार मिठाही पंचायत क्षेत्र में नशामुक्ति को लेकर यह दूसरा जागरूकता कार्यक्रम है. आगे पंचायत के अलग-अलग क्षेत्रों में भी अभियान चलाने की तैयारी है.
बच्चों के नारों से गूंज उठा गांव
प्रभातफेरी के दौरान बच्चों के हाथों में नशामुक्ति से जुड़े संदेश लिखी तख्तियां थीं. बच्चे गांव की गलियों से गुजरते हुए लोगों को नशे के नुकसान के बारे में जागरूक कर रहे थे.
“नशा छोड़ो-परिवार से रिश्ता जोड़ो”, “हम सबने ठाना है-नशामुक्त गांव बनाना है” और “जो पियेगा दारू-उसको लगेगा झाड़ू” जैसे नारों से गांव का माहौल गूंज उठा.
बच्चों का यह संदेश खास इसलिए भी रहा, क्योंकि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले खुद बच्चे थे. उनके नारों ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया कि नशे का असर केवल नशा करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है.
एक व्यक्ति की आदत, पूरे परिवार पर असर
मिठाही पंचायत समिति प्रतिनिधि अशोक कुमार ने कहा कि नशा व्यक्ति के साथ-साथ उसके परिवार और समाज को भी प्रभावित करता है. उन्होंने कहा कि नशामुक्ति के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है.
नशे की वजह से परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित होने के साथ घरेलू तनाव और सामाजिक समस्याएं भी बढ़ सकती हैं. ऐसे में जागरूकता के साथ परिवार और समाज की भागीदारी जरूरी है.
सरपंच बलराम यादव ने कहा कि नशे के कारण कई परिवार प्रभावित हो रहे हैं. गांव को नशामुक्त बनाने के लिए समाज के सभी लोगों को मिलकर प्रयास करना होगा.
युवाओं को बचाने की सबसे बड़ी चुनौती
पूर्व पैक्स अध्यक्ष बालकिशोर यादव ने कहा कि नशे का सबसे अधिक असर युवा पीढ़ी पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि समय रहते युवाओं को नशे से दूर करने के लिए अभिभावकों और समाज को आगे आना होगा.
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बच्चों और युवाओं के बीच नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना लंबे समय में बड़ा असर डाल सकता है. स्कूलों में इस तरह के कार्यक्रम बच्चों को सामाजिक समस्याओं को समझने और उनके खिलाफ आवाज उठाने का अवसर देते हैं.
वहीं अभिभावकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है. बच्चों और युवाओं के व्यवहार में होने वाले बदलाव पर ध्यान देने, उनसे संवाद करने और जरूरत पड़ने पर उचित मदद दिलाने से नशे की समस्या को शुरुआती स्तर पर रोकने में मदद मिल सकती है.
बच्चों ने निभायी सामाजिक जिम्मेदारी
जिला मानवाधिकार संयोजक शंभू कुमार शरण ने कहा कि नशामुक्त समाज बनाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है. बच्चों के माध्यम से चलाया जा रहा जागरूकता अभियान सराहनीय है और इसे दूसरे क्षेत्रों तक भी पहुंचाने की जरूरत है.
बच्चों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय सामाजिक मुद्दों से जोड़ने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण है. जब बच्चे अपने गांव में नशे के खिलाफ संदेश देते हैं, तो परिवारों तक भी यह बात पहुंचती है.
इस तरह स्कूल एक शिक्षा केंद्र के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता का माध्यम भी बन सकता है.
स्कूल में पढ़ाई के साथ सामाजिक चेतना पर जोर
विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्रमोद कुमार ने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवार और भविष्य को प्रभावित करता है. इसी उद्देश्य से बच्चों के माध्यम से ग्रामीणों तक नशामुक्ति का संदेश पहुंचाया गया.
विद्यालय की यह पहल बच्चों में नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का अवसर भी देती है. बच्चे जब किसी सामाजिक मुद्दे पर लोगों के बीच जाकर अपनी बात रखते हैं, तो उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ता है.
एक गांव से शुरू हुआ अभियान, अब पंचायत तक पहुंचाने की तैयारी
जनप्रतिनिधियों ने बताया कि मिठाही पंचायत क्षेत्र में नशामुक्ति को लेकर यह दूसरा जागरूकता कार्यक्रम है. इससे पहले मिठाही में भी इसी तरह का कार्यक्रम आयोजित किया गया था.
उनका कहना है कि अभियान को किसी एक गांव तक सीमित नहीं रखा जाएगा. पंचायत के अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक किया जाएगा.
इसका मतलब यह है कि बैरवा की प्रभातफेरी को एक व्यापक पंचायतस्तरीय अभियान की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि, अभियान की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि जागरूकता के साथ नशे की समस्या को रोकने के लिए परिवार, पंचायत और प्रशासन स्तर पर कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है.
अब नारों से आगे कार्रवाई की जरूरत
बैरवा में बच्चों की प्रभातफेरी ने नशे के खिलाफ एक मजबूत सामाजिक संदेश जरूर दिया है. लेकिन गांव को वास्तव में नशामुक्त बनाने के लिए लगातार जागरूकता के साथ सामुदायिक भागीदारी और प्रशासनिक सहयोग भी जरूरी होगा.
बच्चों की आवाज ने ग्रामीणों तक संदेश पहुंचाया है. अब जिम्मेदारी बड़ों की है कि वे इस संदेश को आगे बढ़ाएं और नशे की समस्या से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए सामने आएं.
अगर बैरवा से शुरू हुआ यह प्रयास पंचायत के दूसरे गांवों तक पहुंचता है और लगातार चलता रहता है, तो आने वाले समय में यह अभियान ग्रामीण स्तर पर नशामुक्ति की दिशा में एक मजबूत पहल बन सकता है.
Madhepura News: ये लोग रहे मौजूद
प्रभातफेरी में ऋतु रंजन, मिठाही के सचिव राजेश रंजन, शंकर पंजियार, शंभू कुमार शरण, नीतीश कुमार सहित विद्यालय के शिक्षक, छात्र-छात्राएं, पंचायत प्रतिनिधि और स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे.
बैरवा की गलियों में बच्चों के नारों से शुरू हुआ यह अभियान एक सवाल भी छोड़ गया है. क्या गांव के बड़े अब बच्चों के इस संकल्प को आगे बढ़ाकर वास्तव में नशामुक्त समाज बनाने की दिशा में कदम
