मधेपुरा के अंबेडकर आवासीय विद्यालय में फूड प्वाइजनिंग: रात का खाना खाकर 36 छात्राएं बीमार

मुरलीगंज के एक आवासीय विद्यालय में रात का खाना खाने के बाद 36 छात्राएं अचानक बीमार पड़ गईं, जिन्हें आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टरों ने फूड प्वाइजनिंग की आशंका जताई है, जिससे भोजन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

रात्रि भोजन के कुछ ही देर बाद छात्राओं को लगातार उल्टी, पेट दर्द, चक्कर, बेचैनी और जी मिचलाने की शिकायत होने लगी. आनन-फानन में विद्यालय प्रशासन द्वारा सभी पीड़ित छात्राओं को एंबुलेंस से मुरलीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों की टीम ने त्वरित इलाज शुरू किया. डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के आधार पर फूड प्वाइजनिंग की आशंका व्यक्त की है.

अस्पताल में आधी रात लगा रहा तांता, 13 छात्राओं को चढ़ाया गया स्लाइन

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रात करीब 11 बजे एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बीमार छात्राओं के पहुंचने से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया. आपातकालीन ड्यूटी पर तैनात डॉ. निशिकांत भारती ने तत्काल अतिरिक्त मेडिकल स्टाफ को काम पर लगाया. उन्होंने बताया कि अधिकांश छात्राओं में डिहाइड्रेशन और कमजोरी के लक्षण थे, जिसके चलते 13 गंभीर छात्राओं को तुरंत स्लाइन चढ़ाई गई. पूरी रात चले सघन उपचार के बाद जब सभी बच्चियों की स्थिति सामान्य और खतरे से बाहर हुई, तब देर रात करीब डेढ़ बजे उन्हें वापस विद्यालय भेजा गया.

भोजन की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल, अधिकारी साध गए चुप्पी

इस घटना की खबर फैलते ही अस्पताल परिसर में अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों की भारी भीड़ जमा हो गई. बीमार छात्राओं और उनके परिजनों ने विद्यालय में परोसे जाने वाले भोजन की खराब गुणवत्ता पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया. हालांकि, इस पूरे मामले पर प्रशासनिक स्तर पर भारी लापरवाही और गोपनीयता बरतने की कोशिश की गई. जब विद्यालय की प्रभारी सह प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) एवं सह प्रखंड कल्याण पदाधिकारी बबीता कुमारी से इस बाबत जानकारी लेने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कैमरे और मीडिया के सामने कुछ भी कहने से साफ इनकार कर दिया.

निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग

घटना की सूचना मिलते ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ता प्रकाश कुमार भी अस्पताल पहुंचे और बीमार छात्राओं का हालचाल जाना. उन्होंने हॉस्टल प्रबंधन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि रात में ही भोजन के सैंपल (नमूने) सुरक्षित नहीं किए जाना जांच को प्रभावित करने की एक साजिश हो सकता है. स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से मांग की है कि भोजन के मेनू, पोषण तत्वों और स्वच्छता की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा बच्चों की सेहत से खिलवाड़ करने वाली संबंधित एजेंसी व दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएं.

बीमार छात्राओं में ये थीं शामिल

फूड प्वाइजनिंग का शिकार हुई कुल 36 छात्राओं में मुख्य रूप से पिंकी कुमारी, अमृता कुमारी, रानी कुमारी, सोनिका सोनम, शिवानी कुमारी, पायल कुमारी, विजेता कुमारी, शबनम कुमारी, नेहा कुमारी, मधुन कुमारी, सोनाक्षी कुमारी, सोनम कुमारी, काजल कुमारी, सरस्वती कुमारी, चंदा कुमारी, नैना कुमारी, नीलू कुमारी, आरती कुमारी, राधा कुमारी, सोनी कुमारी, मीनाक्षी कुमारी, मोनाली कुमारी, अनुपम कुमारी, आकृति कुमारी, ब्यूटी कुमारी और नयंसी प्रिया आदि शामिल हैं.

"हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं में एक जैसे लक्षण मिलना साफ़ तौर पर भोजन में गड़बड़ी की ओर इशारा करता है. मुरलीगंज सीएचसी की मेडिकल टीम ने तत्परता दिखाते हुए सभी बच्चियों का सही समय पर इलाज किया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया. फिलहाल सभी छात्राएं पूरी तरह से सुरक्षित और डॉक्टरों की निगरानी में हैं." — डॉ. निशिकांत भारती, आपातकालीन ड्यूटी प्रभारी, CHC मुरलीगंज


प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >