मैथिली रंगमंच के वरिष्ठ अभिनेता बिंदो यादव का निधन, कला जगत में शोक की लहर

अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने भी फिल्म “रक्ततिलक” देखने के बाद ग्रामीण कलाकारों के अभिनय की सराहना करते हुए कहा था कि इन कलाकारों की सहजता से बहुत कुछ सीखने को मिलता है.

मधेपुरा से कुमार आशीष की रिपोर्ट:

मधेपुरा: मैथिली फिल्म और ग्रामीण रंगमंच से जुड़े वरिष्ठ अभिनेता बिंदो यादव का रविवार अहले सुबह निधन हो गया. बताया गया कि 18 मई की सुबह करीब 3 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर से मैथिली सिनेमा और रंगमंच जगत में शोक की लहर दौड़ गई.

बिंदो यादव सहरसा जिले के पतरघट प्रखंड अंतर्गत कहरा गांव के रहने वाले थे. वे लंबे समय से ग्रामीण रंगमंच से जुड़े हुए थे और अपने सहज अभिनय तथा लोकसंस्कृति से जुड़े योगदान के लिए पहचाने जाते थे. मैथिली शॉर्ट फिल्म “रक्ततिलक” में उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों ने खूब सराहा था. इस फिल्म का प्रदर्शन देश-विदेश के कई फिल्म फेस्टिवल, विश्वविद्यालयों और प्रतिष्ठित संस्थानों में हो चुका है. नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित विशेष प्रदर्शन के दौरान पर्यावरणविद् मेनका गांधी, सांसद रंजीता रंजन सहित कई वरिष्ठ पत्रकार मौजूद थे.

“रक्ततिलक” में उनके उत्कृष्ट अभिनय के लिए बिंदो यादव को विभिन्न मंचों पर सम्मानित भी किया गया था. वे एक कुशल ढोलवादक भी थे और अंतिम समय तक ग्रामीण रंगमंच से सक्रिय रूप से जुड़े रहे.

अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने भी फिल्म “रक्ततिलक” देखने के बाद ग्रामीण कलाकारों के अभिनय की सराहना करते हुए कहा था कि इन कलाकारों की सहजता से बहुत कुछ सीखने को मिलता है.

उनके निधन पर “रक्ततिलक” की निर्मात्री रिंकी झा ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि वे बेहद हंसमुख और अनुशासित कलाकार थे. वहीं निर्माता विष्णु पाठक, मिथिलेश चौरसिया समेत मैथिली सिने जगत के कई कलाकारों ने भी शोक जताया है. अभिनेता राहुल सिन्हा ने कहा कि ग्रामीण रंगमंच में कई प्रतिभाशाली कलाकार हैं और बिंदो यादव उनमें से एक सशक्त उदाहरण थे.

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Published by: Shruti Kumari

Shruti Kumari is a contributor at Prabhat Khabar.

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