कांग्रेस के मैराथन में पहुंचे सरकारी शिक्षक तो मचा विवाद, प्रतिनियुक्ति रद्द होने के बाद DEO ने मांगा जवाब

मधेपुरा में कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' मैराथन में सरकारी शिक्षकों की भागीदारी विवादों में आ गई है. प्रतिनियुक्ति आदेश रद्द होने के बावजूद कार्यक्रम में पहुंचे तीन शिक्षकों से जिला शिक्षा पदाधिकारी ने तुरंत जवाब मांगा है. यह मामला राजनीतिक कार्यक्रमों में सरकारी कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाता है.

Madhepura Teacher Controversy: मधेपुरा में कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के तहत आयोजित मैराथन में सरकारी शिक्षकों की भागीदारी को लेकर शिक्षा विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है. प्रतिनियुक्ति आदेश रद्द होने के बावजूद कार्यक्रम में पहुंचे तीन शिक्षकों से जिला शिक्षा पदाधिकारी ने स्पष्टीकरण मांगा है. तीनों को 24 घंटे के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया है. निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अनुशासनिक कार्रवाई की चेतावनी दी गयी है.

मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि सरकारी शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति एक राजनीतिक दल के कार्यक्रम के लिए की गयी थी. बाद में इसकी जानकारी सामने आने और मामला जिलाधिकारी तक पहुंचने के बाद शिक्षा विभाग ने प्रतिनियुक्ति आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया. इसके बावजूद अगले दिन तीन शिक्षकों के कार्यक्रम में पहुंचने पर विभाग ने उनसे जवाब तलब किया है.

कांग्रेस के अनुरोध पर 16 शिक्षकों की हुई थी प्रतिनियुक्ति

जानकारी के अनुसार, जिला कांग्रेस अध्यक्ष संतोष कुमार सौरभ के अनुरोध पर शिक्षा विभाग ने 22 और 23 अगस्त को संत अवध कीर्ति क्रीड़ा मैदान, पथराहा में आयोजित मैराथन के लिए 16 शारीरिक शिक्षा शिक्षकों और स्वास्थ्य अनुदेशकों की प्रतिनियुक्ति की थी.

इसके लिए 21 अगस्त को आदेश जारी किया गया था. आदेश में संबंधित शिक्षकों और स्वास्थ्य अनुदेशकों को आयोजन स्थल पर उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया था.

यहीं से मामले ने नया मोड़ लिया. राजनीतिक दल के कार्यक्रम में सरकारी शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति किये जाने की जानकारी सामने आने के बाद इस पर सवाल उठने लगे.

जिलाधिकारी तक पहुंचा मामला, फिर रद्द हुआ आदेश

प्रतिनियुक्ति को लेकर विवाद बढ़ने के बाद मामला जिलाधिकारी तक पहुंचा. इसके बाद शिक्षा विभाग ने अपने जारी आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया.

बताया गया कि जिला कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति के लिए 20 अगस्त को पत्र दिया गया था. इसके अगले ही दिन यानी 21 अगस्त को शिक्षा विभाग की ओर से प्रतिनियुक्ति का आदेश जारी कर दिया गया.

हालांकि बाद में मामला संज्ञान में आने के बाद विभाग ने इस आदेश को रद्द कर दिया.

आदेश रद्द होने के बावजूद मैराथन में पहुंचे तीन शिक्षक

प्रतिनियुक्ति रद्द होने के बावजूद 22 अगस्त को तीन शिक्षक मैराथन कार्यक्रम में पहुंचे. इनमें सोनाय अनुप उच्च माध्यमिक विद्यालय, भान टेकठी, घैलाढ़ के दिलीप कुमार, नवसृजित प्राथमिक विद्यालय जीतापुर वार्ड-1, मुरलीगंज के बालकृष्ण कुमार और उत्क्रमित मध्य विद्यालय सकरपुरा के प्रेम कुमार शामिल हैं.

अब शिक्षा विभाग ने इन तीनों शिक्षकों से पूछा है कि प्रतिनियुक्ति आदेश रद्द होने के बाद वे किस परिस्थिति में और किसकी अनुमति से कार्यक्रम में शामिल हुए.

DEO ने 24 घंटे में मांगा स्पष्टीकरण

जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार की ओर से जारी पत्र में तीनों शिक्षकों से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा गया है.

पत्र में उनसे यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि जब प्रतिनियुक्ति आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया था, तो इसके बावजूद उन्होंने कार्यक्रम में भाग क्यों लिया.

विभाग ने 24 घंटे के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है. साथ ही चेतावनी दी गयी है कि निर्धारित समय में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की जा सकती है.

‘भूलवश जारी हुआ था प्रतिनियुक्ति पत्र’

प्रभारी डीईओ रवि शास्त्री ने बताया कि शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति से संबंधित पत्र भूलवश जारी हो गया था. मामला संज्ञान में आने के बाद विभाग ने इसे तत्काल निरस्त कर दिया.

अब विभाग की कार्रवाई का अगला चरण शिक्षकों के स्पष्टीकरण पर निर्भर करेगा. उनके जवाब के बाद यह तय होगा कि मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है.

Madhepura Teacher Controversy: राजनीतिक कार्यक्रमों में सरकारी कर्मियों की भूमिका पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने सरकारी कर्मचारियों की राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों में भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े कर दिये हैं. सरकारी शिक्षक प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा होते हैं और उनकी ड्यूटी को लेकर विभागीय आदेश महत्वपूर्ण होता है.

ऐसे में प्रतिनियुक्ति आदेश जारी होना, फिर उसका निरस्त होना और उसके बाद भी तीन शिक्षकों का कार्यक्रम में पहुंचना अब विभागीय जांच के दायरे में है.

फिलहाल शिक्षा विभाग ने जवाब तलब कर दिया है. अब शिक्षकों के स्पष्टीकरण और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी.

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By Savita Nandan

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