मधेपुरा में रसोइया बहाली के नाम पर हजारों रुपये लेने का आरोप, सिंदुवारी विद्यालय के प्रधानाध्यापक के खिलाफ डीएम से शिकायत

मधेपुरा के मध्य विद्यालय सिंदुवारी के प्रधानाध्यापक पर रसोइया बहाली के नाम पर अवैध वसूली और धमकी देने का गंभीर आरोप, जिलाधिकारी से की गई जांच की मांग.

Madhepura News: मधेपुरा में सरकारी स्कूलों में रसोइया बहाली और मध्याह्न भोजन योजना से जुड़े मामलों पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन ग्वालपाड़ा प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय सिंदुवारी से सामने आया मामला स्थानीय स्तर पर गंभीर चर्चा का विषय बन गया है. यहां की दो महिलाओं ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक मनोज कुमार उर्फ भवेश मेहता पर आरोप लगाया है कि उन्होंने रसोइया पद पर नियोजन और मानदेय दिलाने के नाम पर उनसे बड़ी रकम वसूली, लेकिन न तो नियमित भुगतान कराया और न ही पैसे वापस किए. महिलाओं का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने अपना बकाया मांगा, तो उन्हें विद्यालय आने से मना कर दिया गया और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई.

इस पूरे मामले में अब जिलाधिकारी को लिखित आवेदन दिया गया है और उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है.

रसोइया बहाली के नाम पर पैसे लेने का आरोप

सिंदुवारी वार्ड संख्या 16 निवासी बेबी देवी और किरण देवी ने जिलाधिकारी को दिए आवेदन में कहा है कि प्रधानाध्यापक ने उन्हें विद्यालय में रसोइया पद पर बहाली कराने का भरोसा दिलाया. आरोप है कि इसी बहाने दोनों महिलाओं से 20-20 हजार रुपये नकद लिए गए.

महिलाओं के अनुसार इसके बाद कागजात जमा कराने और शीघ्र मानदेय भुगतान का आश्वासन देकर उनसे अलग-अलग तीन किस्तों में पांच-पांच हजार रुपये और लिए गए. उनका कहना है कि पूरी राशि उन्होंने सूद-ब्याज पर कर्ज लेकर जुटाई थी.

15 अगस्त 2024 से काम करने का दावा

आवेदन में दोनों महिलाओं ने दावा किया है कि वे 15 अगस्त 2024 से विद्यालय में नियमित रूप से बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन बना रही हैं. इसके बावजूद अब तक उन्हें नियमित मानदेय नहीं मिला.

उन्होंने कहा कि आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने लगातार काम किया, इस उम्मीद में कि उन्हें नियमानुसार भुगतान मिलेगा. लेकिन समय बीतने के साथ न तो मानदेय मिला और न ही उनसे लिए गए रुपये लौटाए गए.

सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने का भी उल्लेख

महिलाओं ने आवेदन में यह भी कहा है कि वर्ष 2025 में विद्यालय प्रबंधन समिति से संबंधित दस्तावेजों पर उनसे हस्ताक्षर कराए गए थे. उसी वर्ष पुलिस सत्यापन और संबंधित अधिकारियों द्वारा सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी कराई गई थी.

उनका कहना है कि इन प्रक्रियाओं के बाद उन्हें विश्वास हो गया था कि उनका नियोजन नियमित रूप से मान्य हो चुका है और जल्द ही भुगतान शुरू हो जाएगा.

बकाया मांगने पर धमकी देने का आरोप

दोनों महिलाओं का आरोप है कि जब उन्होंने बकाया मानदेय की मांग की, तो प्रधानाध्यापक ने उनके साथ अमर्यादित व्यवहार किया. आवेदन के अनुसार उन्हें विद्यालय आने से रोक दिया गया और झूठे मुकदमे में फंसाकर पूरे परिवार को बर्बाद करने की धमकी भी दी गई.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उपस्थिति पंजी चोरी होने का बहाना बनाकर उनकी हाजिरी नहीं बनाई जा रही है, जिससे भविष्य में उनके काम करने के दावे को कमजोर किया जा सके.

प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल

आवेदन में प्रधानाध्यापक पर धोखाधड़ी, विश्वासघात और आर्थिक शोषण का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच, दोषी के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई और बकाया मानदेय का भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की गई है.

आवेदन की प्रतिलिपि ग्वालपाड़ा थाना, अनुमंडल पदाधिकारी उदाकिशुनगंज, जिला शिक्षा पदाधिकारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ग्वालपाड़ा और बिहारीगंज के स्थानीय विधायक को भी भेजी गई है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल दो महिलाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विद्यालयों में नियोजन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा.

Madhepura News: बीईओ ने क्या कहा

प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी दिनेश कुमार राम ने संपर्क करने पर बताया कि उन्हें विद्यालय से जुड़े विवाद की मौखिक जानकारी मिली है. कुछ ग्रामीण उनसे मिलने आए थे और उन्हें समझा-बुझाकर भेज दिया गया.

उन्होंने कहा कि उनके कार्यालय को अब तक इस मामले में कोई लिखित आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है. ऐसे में आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी.

फिलहाल पूरा मामला जिलाधिकारी के समक्ष है और स्थानीय लोग अब यह देख रहे हैं कि जांच कब शुरू होती है और प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है.

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लेखक के बारे में

By कुमार आशीष

कुमार आशीष 15 वर्षों से प्रभात खबर समूह के साथ पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से जनसंचार में डिग्री प्राप्त करने के बाद इन्होंने राजनीति, अपराध और कोसी अंचल की रिपोर्टिंग में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पिछले पांच वर्षों से सक्रिय हैं. पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए इन्हें नेपाल में 'अंतरराष्ट्रीय मैथिली युवा पत्रकारिता सम्मान' से नवाजा जा चुका है.

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