40 लाख का स्कूल भवन 18 महीने बाद भी अधूरा, फूस के कमरे में पढ़ रहे बच्चे

मधेपुरा के मधुरापुर मुसहरी में 40 लाख रुपये से बन रहा स्कूल भवन 18 महीने बाद भी अधूरा है. ग्रामीणों ने जमीन दान दी, पर बच्चे आज भी फूस और चदरे के अस्थायी कमरे में पढ़ने को मजबूर हैं. बच्चों के भविष्य से जुड़ा यह मामला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है.

Madhepura School News: मधेपुरा में जिस स्कूल भवन में बच्चों को सुरक्षित और बेहतर माहौल में पढ़ाई करनी थी, उसका निर्माण 18 महीने बाद भी पूरा नहीं हो सका है. मधेपुरा के चौसा प्रखंड की अरजपुर पश्चिमी पंचायत स्थित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय मधुरापुर मुसहरी आज भी अधूरे भवन के बीच अपनी मंजिल तलाश रहा है. भवन की दीवारें अधबनी हैं, जबकि प्लास्टर, फर्श और शौचालय का काम बाकी है.

नतीजा यह है कि स्कूल के बच्चे अब भी फूस और चदरे से बने अस्थायी कमरे में पढ़ने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जिस विद्यालय के लिए गांव के लोगों ने अपनी जमीन तक दान दी, उसी स्कूल का पक्का भवन वर्षों के इंतजार के बाद भी बच्चों को नहीं मिल पाया.

40 लाख रुपये मंजूर, फिर भी पूरा नहीं हुआ भवन

ग्रामीणों के अनुसार लंबे इंतजार के बाद वर्ष 2024 में शिक्षा विभाग ने विद्यालय भवन और बालक-बालिका शौचालय निर्माण के लिए करीब 40 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की थी.

निर्माण की जिम्मेदारी मधेपुरा के संवेदक इमतियाज आलम को दी गयी. करार के अनुसार भवन का निर्माण छह महीने के भीतर पूरा कर विभाग को हैंडओवर किया जाना था.

लेकिन छह महीने की निर्धारित अवधि कब की खत्म हो चुकी है. निर्माण शुरू हुए करीब 18 महीने बीतने के बाद भी भवन अधूरा है.

2000 में जमीन दान, 2006 में शुरू हुआ स्कूल

मधुरापुर मुसहरी के ग्रामीणों के लिए यह विद्यालय महज एक सरकारी स्कूल नहीं है. यह मुसहर समुदाय के बच्चों की शिक्षा की उम्मीद से जुड़ा है.

ग्रामीणों के अनुसार गांव के ही बिनोदी ऋषिदेव और रामधन ऋषिदेव ने वर्ष 2000 में अपने वास की जमीन में से दो कट्ठा जमीन बिहार के राज्यपाल को दान स्वरूप दी थी.

इसके बाद वर्ष 2006 में शिक्षा विभाग ने यहां नवसृजित प्राथमिक विद्यालय की स्थापना की. दो शिक्षकों की पदस्थापना के साथ बच्चों की पढ़ाई शुरू हुई.

लेकिन करीब दो दशक का समय गुजरने के बाद भी विद्यालय को स्थायी भवन नहीं मिल सका. बच्चे अब तक फूस और चदरे के अस्थायी कमरे में पढ़ने को मजबूर हैं.

अधूरी दीवारें बता रही हैं निर्माण की कहानी

मौजूदा स्थिति में विद्यालय भवन की दीवारें अधूरी हैं. प्लास्टर और फर्श का काम बाकी है. बालक और बालिकाओं के लिए बनने वाले शौचालय का निर्माण भी पूरा नहीं हुआ है.

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू से ही गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में रहा है. उनका कहना है कि भवन निर्माण में पर्याप्त मात्रा में सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया और मानक के अनुरूप छड़ भी नहीं लगायी गयी.

हालांकि निर्माण की गुणवत्ता से जुड़े इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे में भवन की तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन हुआ है या नहीं.

बारिश और गर्मी में बच्चों की पढ़ाई पर असर

विद्यालय भवन अधूरा रहने का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है. अस्थायी फूस और चदरे के कमरे में पढ़ाई करना बच्चों और शिक्षकों के लिए परेशानी भरा है.

बारिश के दौरान पानी और कीचड़ की समस्या बढ़ जाती है, जबकि गर्मी में चदरे के कमरे के भीतर पढ़ाई का माहौल मुश्किल हो जाता है.

ग्रामीणों का कहना है कि जिन बच्चों के लिए पक्का स्कूल भवन शिक्षा की बेहतर शुरुआत का माध्यम बनना था, उन्हें अभी भी बुनियादी सुविधाओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है.

ग्रामीणों ने डीएम से की कार्रवाई की मांग

भवन निर्माण में देरी और कथित गुणवत्ता संबंधी शिकायतों को लेकर मधुरापुर मुसहरी के ग्रामीणों में आक्रोश है.

चमकलाल ऋषिदेव, सिकंदर ऋषिदेव, अकली देवी, शिव ऋषिदेव, अधिकलाल ऋषिदेव, नरेश ऋषिदेव, संजय ऋषिदेव, राधे ऋषिदेव, पूनम देवी और अनिल ऋषिदेव समेत अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को आवेदन दिया है.

ग्रामीणों ने संवेदक के खिलाफ कार्रवाई करने और अधूरे भवन का निर्माण जल्द पूरा कराने की मांग की है.

Madhepura School News: अब सवाल सिर्फ भवन का नहीं, बच्चों के भविष्य का है

करीब 40 लाख रुपये की स्वीकृति, छह महीने की निर्माण अवधि और 18 महीने का इंतजार. इन तीन आंकड़ों के बीच मधुरापुर मुसहरी के बच्चों की कहानी छिपी है.

एक तरफ गांव के लोगों ने विद्यालय के लिए जमीन दान दी. दूसरी तरफ वर्षों बाद जब पक्के भवन की उम्मीद जगी, तो निर्माण अधूरा रह गया.

अब प्रशासन के सामने दो अहम सवाल हैं. भवन निर्माण में देरी की वजह क्या है और निर्माण की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं. यदि तकनीकी जांच में गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई और बच्चों को जल्द सुरक्षित विद्यालय भवन उपलब्ध कराना जरूरी होगा.

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लेखक के बारे में

By कुमार आशीष

कुमार आशीष 15 वर्षों से प्रभात खबर समूह के साथ पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से जनसंचार में डिग्री प्राप्त करने के बाद इन्होंने राजनीति, अपराध और कोसी अंचल की रिपोर्टिंग में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पिछले पांच वर्षों से सक्रिय हैं. पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए इन्हें नेपाल में 'अंतरराष्ट्रीय मैथिली युवा पत्रकारिता सम्मान' से नवाजा जा चुका है.

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