Madhepura News: उदाकिशुनगंज, मधेपुरा. स्कूल में बच्चों के लिए परोसा गया मध्याह्न भोजन बुधवार को उस समय सवालों के घेरे में आ गया, जब खाना खाने के कुछ देर बाद एक-एक कर 14 बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी. किसी ने सिर और पेट दर्द की शिकायत की, तो कुछ बच्चों को उल्टी होने लगी. स्थिति ऐसी बनी कि विद्यालय परिसर में अफरातफरी मच गयी और बीमार बच्चों को आनन-फानन में अनुमंडलीय अस्पताल ले जाना पड़ा.
मामला नगर परिषद क्षेत्र के उत्क्रमित मध्य विद्यालय डोहटबारी का है. बच्चों के अस्पताल पहुंचने की खबर मिलते ही अभिभावक भी बड़ी संख्या में वहां पहुंच गये. बाद में कई अभिभावक विद्यालय परिसर में भी जुटे और मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता को लेकर नाराजगी जतायी. कुछ अभिभावकों ने भोजन में कीड़ा मिलने का आरोप लगाया. हालांकि, बच्चों के बीमार पड़ने की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है. विभागीय जांच के बाद ही स्थिति साफ होने की उम्मीद है.
खाना खाने के बाद अचानक बिगड़ने लगी तबीयत
बुधवार दोपहर विद्यालय में बच्चों को मध्याह्न भोजन परोसा गया. भोजन करने के कुछ देर बाद कई बच्चों ने सिर और पेट में दर्द की शिकायत की. इसके बाद कुछ बच्चों को उल्टी होने लगी. कुछ बच्चों के विद्यालय में ही बेहोश होने की बात भी अभिभावकों ने कही.
विद्यालय में मौजूद शिक्षकों ने स्थिति संभालने की कोशिश की. प्रधानाध्यापक और शिक्षकों की मदद से बीमार बच्चों को अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचाया गया. अस्पताल में चिकित्सकों ने बच्चों का तत्काल उपचार शुरू किया. इलाज के बाद सभी बच्चों की हालत सामान्य बतायी गयी.
बीमार बच्चों में गुरूचरण कुमार (8), तनुजा कुमारी (6), माही कुमारी (8), रोहित कुमार (12), आरती कुमारी (8), दिलीप कुमार (8), अभिनंदन कुमार (10), मोनू कुमार (12), इंद्रजीत कुमार (10) और प्रशांत कुमार (9) सहित अन्य बच्चे शामिल हैं.
बच्चों के अस्पताल पहुंचते ही अभिभावकों में बढ़ा आक्रोश
बच्चों की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही अभिभावक अस्पताल पहुंचने लगे. वहां अपने बच्चों को उपचार कराते देख कई अभिभावक विद्यालय प्रबंधन से नाराज दिखे.
अभिभावकों का कहना था कि भोजन खाने के थोड़ी देर बाद ही बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी. उनका आरोप था कि बच्चों के बीमार पड़ने की सूचना उन्हें समय पर नहीं दी गयी. इसकी जानकारी मिलने के बाद उन्हें खुद अस्पताल पहुंचना पड़ा.
कुछ अभिभावकों ने विद्यालय में नियमित रूप से गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन नहीं मिलने का भी आरोप लगाया. उनका कहना था कि अच्छे चावल के बजाय खराब चावल से भोजन तैयार कराया जाता है. भोजन में कीड़ा मिलने के आरोप ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है.
रसोईया का दावा, चने में दिखा था कीड़ा
मामले में विद्यालय की रसोईया कल्पना देवी के बयान ने कई सवाल खड़े कर दिये हैं. रसोईया के अनुसार बुधवार को भोजन तैयार करने के दौरान चने में कीड़ा दिखाई दिया था.
उन्होंने दावा किया कि उन्होंने इसकी जानकारी प्रधानाध्यापिका को दी थी और चने में मौजूद कीड़ा भी दिखाया था. रसोईया के मुताबिक इसके बावजूद उस दिन भोजन तैयार करने को कहा गया. साथ ही अगले दिन साफ चना मंगाने की बात कही गयी.
रसोईया के इस दावे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि यदि खाद्य सामग्री में गड़बड़ी की आशंका पहले ही सामने आ गयी थी, तो उसे भोजन में इस्तेमाल करने की अनुमति क्यों दी गयी. हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.
प्रधानाध्यापिका ने भोजन में गड़बड़ी से किया इनकार
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सुमन कुमारी दास ने मध्याह्न भोजन में किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है. उनका कहना है कि उन्होंने स्वयं बच्चों के साथ वही भोजन किया था.
प्रधानाध्यापिका ने बताया कि भोजन के समय का फोटो भी कैमरे से लिया गया है. उनके अनुसार बच्चों की तबीयत किस कारण से खराब हुई, इसका अभी पता नहीं चल पाया है. चिकित्सकीय जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा.
उन्होंने यह भी बताया कि बीमार हुए सभी 14 बच्चों को विद्यालय की ओर से अस्पताल पहुंचाया गया.
बीईओ की जांच में सामने आयी लापरवाही
घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सागर कुमार चौधरी विद्यालय और अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचे. उन्होंने अस्पताल में भर्ती बच्चों और उनके अभिभावकों से जानकारी ली. इसके बाद विद्यालय पहुंचकर मध्याह्न भोजन से जुड़े मामले की भी पड़ताल की.
बीईओ ने प्रथम दृष्टया विद्यालय की प्रधानाध्यापिका और रसोईया की लापरवाही सामने आने की बात कही है. उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट वरीय पदाधिकारी को भेजी जायेगी. जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जायेगी.
इस बयान के बाद अब विभागीय जांच की भूमिका महत्वपूर्ण हो गयी है. जांच में खाद्य सामग्री, भोजन तैयार करने की प्रक्रिया और बच्चों के बीमार पड़ने के कारण समेत पूरे मामले की पड़ताल की जायेगी.
डॉक्टर ने कहा, सभी बच्चे खतरे से बाहर
अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पीपी राजन ने बताया कि मध्याह्न भोजन खाने के बाद बीमार हुए बच्चों का अस्पताल में उपचार किया गया. इलाज के बाद सभी बच्चे स्वस्थ हैं और फिलहाल किसी बच्चे को खतरे जैसी कोई बात नहीं है.
यह राहत की बात है कि घटना के बाद किसी बच्चे की हालत गंभीर नहीं हुई. लेकिन भोजन खाने के बाद एक साथ 14 बच्चों के बीमार पड़ने की घटना ने स्कूलों में बच्चों को दिये जाने वाले मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं.
Madhepura News: अब जांच से खुलेगा बीमारी का असली कारण
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि बच्चों की तबीयत आखिर किस वजह से बिगड़ी. क्या मध्याह्न भोजन में इस्तेमाल की गयी खाद्य सामग्री खराब थी, क्या चने में वास्तव में कीड़ा था, या बच्चों के बीमार पड़ने की कोई दूसरी वजह थी. इन सवालों का जवाब विभागीय जांच और चिकित्सकीय पड़ताल के बाद ही मिल सकेगा.
घटना ने यह भी सामने ला दिया है कि विद्यालयों में बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने के साथ उसकी गुणवत्ता की नियमित निगरानी कितनी जरूरी है. अभिभावकों की शिकायतों और रसोईया के दावे की जांच के साथ यह भी देखना होगा कि खाद्य सामग्री के भंडारण और भोजन तैयार करने के दौरान निर्धारित मानकों का पालन किया गया था या नहीं.
अब निगाहें शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं. रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि 14 बच्चों के बीमार पड़ने की वजह क्या थी और मध्याह्न भोजन में कीड़ा मिलने की शिकायत में कितनी सच्चाई है. साथ ही यह भी तय होगा कि लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है
